सीजी भास्कर, 6 सितंबर। छत्तीसगढ़ प्रदेश इस समय मौसमी बीमारियों से ग्रसित चल रहा है ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने 18 अगस्त से अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन (NHM Employees Protest) की घोषणा की थी जो अब भी जारी है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अमित मिरी ने बताया कि, विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भारतीय जनता पार्टी की घोषणा पत्र में मोदी की गारंटी का उल्लेख करते हुए संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण का वादा किया गया था, परंतु सरकार बनने के 20 माह होने के बाद और 160 से अधिक ज्ञापन मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, वित्त मंत्री, उपमुख्यमंत्री, विधायक सांसदों को देने के पश्चात भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
निराश होकर वर्ष 2024 के विधानसभा मानसून सत्र के दौरान 22 एवं 23 जुलाई को दो दिवसीय प्रदर्शन, 1 मई 2025 को विश्व मजदूर दिवस तथा इसी वर्ष विधानसभा मानसून सत्र के दौरान 16 तथा 17 जुलाई को पुनः दो दिवसीय प्रदर्शन (NHM Employees Protest) किया गया। 17 जुलाई को ही राज्य कार्यालय के उच्च अधिकारियों को यह अवगत कराया गया था कि यदि 15 अगस्त तक किसी प्रकार की कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो उसके पश्चात कर्मचारी आंदोलन पर जाएंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी। अवगत होना चाहेंगे कि शासन की इस प्रकार की अपेक्षा और सुस्ती ने ही 16 हज़ार एनएचएम कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना छोड़ आंदोलन पर जाने को विवश किया। स्पष्ट है कि, इस पूरे आंदोलन के लिए पूरी तरह से शासन और प्रशासन का अपेक्षा पूर्ण व्यवहार ही जिम्मेदार है।
आंदोलन के दौरान ही स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा यह कहा गया कि 10 सूत्री मांगों में से मुख्य मांग का निराकरण केंद्र सरकार की अनुमति से होगा, जबकि संघ का कहना है कि स्वास्थ्य राज्य का मामला है, ऐसे में इसमें पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की बनती है। जिन अन्य पांच मांगों पर शासन द्वारा सहमति की बात कही गई है, उस पर छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ को निम्न बिंदुओं के आधार पर आपत्ति है:
1- ट्रांसफर नीति में विलंब
2- सीआर व्यवस्था में पारदर्शिता का अभाव
3- 10 लाख तक का कैशलेस बीमा अभी लागू नहीं हुआ
4- लंबित 27% वेतन वृद्धि को केवल 5% किया गया
5- दुर्घटना या बीमारी में सवैतनिक अवकाश का सीमित प्रावधान
छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ (NHM Employees Protest) का कहना है कि नियमितकरण, ग्रेड पे, अनुकंपा नियुक्ति, पब्लिक हेल्थ कैडर जैसी जरूरी मांगों को किनारे कर शासन अपनी उपलब्धि बता रहा है जो सही नहीं है। राज्य शासन के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा बार-बार यह कहा जाना कि इसमें केंद्र की मंजूरी जरूरी है, पूरी तरह गलत जानकारी है। भारत सरकार के संयुक्त सचिव मनोज झालानी द्वारा प्रेषित पत्र और सितंबर 2025 में सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी में यह साबित हुआ कि एनएचएम कर्मचारियों के नियमितीकरण सहित अन्य सुविधाओं के लिए राज्य सरकार ही जिम्मेदार है।
आंदोलन के दौरान शासन ने दमनपूर्ण कार्यवाही करते हुए सभी को 24 घंटे के भीतर वापस अपनी ड्यूटी ज्वाइन करने की चेतावनी दी। इसके विरोध में राज्य स्वास्थ्य भवन का घेराव करते हुए कर्मचारियों ने पत्र फाड़कर जला दिया। बाद में उच्च अधिकारियों के साथ चर्चा हुई, परंतु कोई समाधान नहीं निकला और आंदोलन जारी रहा। इसी दौरान प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से वीडियो मैसेज के माध्यम से हस्तक्षेप की अपील की, किंतु शाम को ही कर्मचारी संघ के प्रदेश और जिला स्तरीय 29 पदाधिकारियों को सेवा से पृथक कर दिया गया। इसके विरोध में 4 सितंबर को पूरे प्रदेश के बचे हुए कर्मचारियों ने अपने-अपने जिला कार्यालय में सामूहिक त्यागपत्र देकर आंदोलन को और तेज करने की घोषणा की।
शासन और कर्मचारियों के बीच आपसी संवाद की कमी से प्रदेश की जनता की मुश्किलें बढ़ीं। हड़ताल के कारण पोषण पुनर्वास केंद्र, स्कूलों और आंगनबाड़ी में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण, टीबी-मलेरिया की जांच, प्रसव कार्य, टीकाकरण, नवजात शिशु स्वास्थ्य केंद्र जैसी जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं बाधित हुई। छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ शासन से यह मांग करता है कि वह तत्काल संवाद के माध्यम से हल निकाले।



