सीजी भास्कर, 5 अक्टूबर। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन सात अक्टूबर को संसद परिसर में विभिन्न दलों के नेताओं से औपचारिक बैठक करेंगे। यह उनकी उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद नेताओं के साथ पहली मुलाकात होगी। बैठक का उद्देश्य संसद के आगामी शीतकालीन सत्र से पहले संवाद और बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना है। इस पहल को विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के बीच रिश्तों को सहज बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
बैठक संसद भवन परिसर में शाम चार बजे से होगी। इसमें भाजपा अध्यक्ष और सदन के नेता जेपी नड्डा, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे (Vice President Meeting with Leaders), संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजु, राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और एल मुरुगन शामिल होंगे। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, आप, राजद, बीजद, अन्ना द्रमुक, माकपा, भाकपा, राकांपा और जद(स) के नेताओं को भी बुलाया गया है।
विपक्ष और सहयोगी दलों का व्यापक प्रतिनिधित्व
बैठक में शरद पवार, एचडी देवेगौड़ा, एम थंबीदुरई, संजय सिंह, तिरुचि शिवा, सुभाष चंद्र बोस पिल्ली, प्रेम चंद गुप्ता, संजय राउत, राम गोपाल यादव, जान ब्रिटास, प्रफुल्ल पटेल, संतोष कुमार पी, संजय कुमार झा, रामदास अठावले (Vice President Meeting with Leaders), अब्दुल वहाब, जीके वासन और केआर सुरेश रेड्डी जैसे वरिष्ठ नेता हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने शामिल होने से असमर्थता जताई है। उनकी जगह पत्रकार और सांसद सागरिका घोष बैठक में मौजूद रह सकती हैं।
शीतकालीन सत्र से पहले रणनीतिक पहल
सूत्रों का कहना है कि यह बैठक संसद के शीतकालीन सत्र से पहले एक रणनीतिक प्रयास है। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का मानना है कि संवाद और परामर्श से लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत होती हैं। विपक्षी नेताओं से मुलाकात की यह कवायद दरअसल एक सकारात्मक संदेश है कि उपराष्ट्रपति सत्ता और विपक्ष दोनों को साथ लेकर चलने के पक्षधर हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में मददगार साबित हो सकती है। बीते सत्रों में लगातार हंगामे और गतिरोध देखने को मिले थे, जिन्हें कम करने के लिए यह संवाद जरूरी माना जा रहा है। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन (Vice President Meeting with Leaders) ने पहले भी कई मौकों पर विपक्षी नेताओं के योगदान की सराहना की है और उन्हें लोकतंत्र की मजबूती में अहम बताया है।
लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा
बैठक से यह उम्मीद की जा रही है कि सत्ता और विपक्ष के बीच सहयोग का माहौल बनेगा और आने वाले शीतकालीन सत्र में महत्वपूर्ण विधेयकों पर सार्थक चर्चा हो सकेगी। इस औपचारिक बैठक के जरिए उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन यह संकेत भी देंगे कि संवाद और सहमति लोकतंत्र की नींव हैं। यह पहली बार है जब वे इस स्तर पर विभिन्न दलों के नेताओं (Vice President Meeting with Leaders) से एक साथ मुलाकात करेंगे।


