Patna University: बीएड सेशन 2024-26 के नतीजों में भारी गड़बड़ी
सीजी भास्कर 17 अक्टूबर : पटना यूनिवर्सिटी (Patna University) सेशन 2024-26 के बीएड छात्रों के नतीजों में बड़ा घोटाला सामने आया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जिन अंकपत्रों (Marksheet) को हाल ही में जारी किया था, उनमें विषय और अंकों की गलत प्रविष्टियाँ की गईं।
छात्रों का आरोप है कि उन्हें 40 में से 34 अंक मिलने के बावजूद फेल घोषित कर दिया गया। कई छात्रों के अनुसार, जिन विषयों में वे पहले से पास थे, उसी में उन्हें फेल दिखा दिया गया — वहीं कुछ फेल स्टूडेंट्स को पास बताया गया है।
अंकपत्र देखकर हैरान रह गए छात्र
जब बीएड सेशन 2024-26 के स्टूडेंट्स ने अपनी मार्कशीट देखी, तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि यह (focus keyphrase: University Result Error) यूनिवर्सिटी की ओर से जारी की गई है।
छात्र अभिषेक कुमार झा ने बताया, “मैंने 40 में से 34 नंबर हासिल किए हैं, फिर भी मार्कशीट में मुझे फेल दिखाया गया है। यह साफ गलती है।”
इस घटना के बाद कैंपस में नाराज़गी बढ़ गई और कई छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक कार्यालय में जाकर आपत्ति दर्ज कराई।
गलत तारीख, गलत फॉर्मेट और गलत जानकारी
जारी अंकपत्रों में केवल अंकों की नहीं, बल्कि परीक्षा तारीख की भी गड़बड़ी मिली है।
मई 2025 में हुई परीक्षा को अंकपत्र में जनवरी 2025 दिखा दिया गया।
कई छात्रों ने बताया कि टैबुलेशन रजिस्टर में उनके अंक सही दर्ज हैं, लेकिन स्कोरकार्ड में कई जगह कम अंक दिखाए गए हैं। इससे यह साफ होता है कि (Marksheet Error) डेटा एंट्री के दौरान गंभीर लापरवाही हुई है।
क्यों हुई गड़बड़ी – क्या है यूनिवर्सिटी का बयान
परीक्षा नियंत्रक प्रो. बी.के. लाल ने स्वीकार किया कि गड़बड़ी बाहरी एजेंसी की गलती से हुई है।
उन्होंने बताया कि “एजेंसी ने गलती से दूसरे विश्वविद्यालय के फॉर्मेट का उपयोग कर स्कोरकार्ड तैयार कर दिए।”
उन्होंने कहा कि सभी फर्जी या त्रुटिपूर्ण अंकपत्रों को रद्द (Cancelled) किया जा चुका है और एक सप्ताह के भीतर नई मार्कशीट जारी करने का आदेश दिया गया है।
छात्रों को राहत – नई मार्कशीट जल्द जारी होगी
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि छात्रों को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।
जिन स्टूडेंट्स की मार्कशीट में त्रुटि पाई गई है, उन्हें नई Corrected Marksheet दी जाएगी।
साथ ही, संबंधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात भी कही गई है ताकि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो।
बड़ा सवाल – जांच के दायरे में एजेंसी और प्रशासन दोनों
इस पूरे मामले ने (Education System Error) पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आखिर कैसे इतने बड़े पैमाने पर गलत मार्कशीट जारी हो गई और यूनिवर्सिटी प्रशासन को पता तक नहीं चला?
अब सभी की निगाहें उस जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं जो एजेंसी की लापरवाही और तकनीकी खामी के पीछे की पूरी सच्चाई उजागर करेगी।


