सीजी भास्कर, 25 अक्टूबर। स्मार्ट सिटी बिलासपुर में करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई पंडित श्यामलाल चतुर्वेदी स्मार्ट रोड (नेहरू नगर से नर्मदा नगर तक) पर लगे ट्रैफिक सिग्नल महीनों से बंद हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ट्रैफिक पुलिस के उच्च अधिकारी तक इस स्थिति से अनजान हैं (Bilaspur Traffic Signal News)। स्मार्ट सिटी योजना के तहत सड़क का सौंदर्यीकरण तो पूरा हुआ, लेकिन ट्रैफिक प्रबंधन की व्यवस्था अधूरी पड़ी है, जिससे लोगों की जान पर जोखिम बना हुआ है।
लाखों की लागत के बावजूद नहीं हुआ संचालन
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्मार्ट रोड पर लगा ट्रैफिक सिग्नल कई महीनों से बंद है। करोड़ों की परियोजना के अंतर्गत लगाया गया यह सिस्टम न तो चालू हुआ और न ही मेंटेनेंस के लिए किसी जिम्मेदार अधिकारी को तैनात किया गया। यही नहीं, सिग्नल के पास कुछ दूरी पर एक और ट्रैफिक खंभा खड़ा कर छोड़ दिया गया है, जिसमें लाइट तक नहीं लगाई गई।
इस चौराहे से चारों दिशाओं से ट्रैफिक (Bilaspur Traffic Signal News) का दबाव रहता है। हर दिन सुबह-शाम ऑफिस टाइम और स्कूल बसों के दौरान अराजक स्थिति बन जाती है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि ट्रैफिक जवानों की अनुपस्थिति और बंद सिग्नल के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है ।
क्षेत्रवासियों की मांग: लगे जवान, बने अस्थायी चौक
नेहरू नगर से नर्मदा नगर को जोड़ने वाली इस स्मार्ट रोड पर क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि जिस सिग्नल को महीनों पहले लगाया गया था, उसे तुरंत चालू किया जाए, और दोनों छोरों पर ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटी अनिवार्य की जाए। इसके साथ ही, चौराहे पर स्टॉपर लगाकर एक अस्थायी ट्रैफिक चौक बनाया जाए ताकि वाहनों की आवाजाही नियंत्रित रह सके और पैदल यात्रियों को भी सुरक्षा मिले।
प्रशासन और पुलिस दोनों की चुप्पी
स्मार्ट सिटी के तहत काम कर रही एजेंसियों और ट्रैफिक विभाग के बीच समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। न तो नगर निगम के इंजीनियर इस खामोश सिग्नल की जिम्मेदारी ले रहे हैं, और न ही ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी यह बता पा रहे हैं कि इसे कब चालू किया जाएगा। फिलहाल यह “स्मार्ट रोड पर बंद सिग्नल” शहर की स्मार्टनेस पर सवालिया निशान बन गया है।


