दुर्ग | राष्ट्रीय (Cyber Security Awareness Month 2025) के तहत 24 अक्टूबर को पॉवरग्रिड दुर्ग में एक विशेष साइबर सुरक्षा जागरूकता व्याख्यान सत्र आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में पॉवरग्रिड के कर्मचारी, उनके परिवारजन और संविदा श्रमिक शामिल हुए। उद्देश्य था — लोगों को बढ़ते साइबर अपराधों से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना और डिजिटल दुनिया में सुरक्षा के व्यावहारिक तरीके समझाना।
मुख्य अतिथि और विशेषज्ञों ने साझा किए सुरक्षा सूत्र
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (दुर्ग) श्री सुख नंदन राठौर उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. संकल्प राय, सब-इंस्पेक्टर, साइबर सेल दुर्ग, ने भाग लिया।
दोनों अतिथियों ने बताया कि आज के समय में (Cyber Security) व्यक्तिगत जिम्मेदारी का विषय बन गया है। छोटे से क्लिक या अनजान लिंक पर भरोसा करना गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। उन्होंने डिजिटल लेनदेन, सोशल मीडिया सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन से जुड़ी कई वास्तविक घटनाओं के उदाहरण देकर सभी को सावधानी बरतने की सलाह दी।
POLICE शब्द से समझाया गया साइबर सुरक्षा मंत्र
कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली हिस्सा रहा — “POLICE” का फुल फॉर्म आधारित साइबर सुरक्षा संदेश, जिसे बेहद सरल और यादगार तरीके से समझाया गया:
- P (Password): अपना पासवर्ड किसी से साझा न करें।
- O (OTP): वन टाइम पासवर्ड को सुरक्षित रखें, साझा न करें।
- L (Link): किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
- I (Identity): अपनी डिजिटल पहचान की सुरक्षा करें।
- C (Chatting): अजनबियों से बातचीत करते समय सतर्क रहें।
- E (Emergency): किसी साइबर आपात स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
यह संदेश (Cyber Security Awareness) के तहत लोगों को रोजमर्रा की डिजिटल जिंदगी में सतर्क रहने की प्रेरणा देता है।
“साइबर जागरूक भारत” पहल से जुड़ी मुहिम
यह सत्र “साइबर जागरूक भारत” पहल का हिस्सा है — जिसका लक्ष्य है हर नागरिक को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने साइबर फ्रॉड, फिशिंग, पासवर्ड सुरक्षा और डेटा लीक जैसे मुद्दों पर प्रश्न पूछे और विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त किया।
सभी प्रतिभागियों ने इस पहल को सूचनात्मक और व्यावहारिक बताते हुए अपने जीवन में बताए गए उपाय अपनाने का संकल्प लिया।
शिकायत और सहायता के लिए हेल्पलाइन
यदि कोई व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार होता है, तो वह सीधे राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी साइबर सेल से संपर्क कर सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि त्वरित शिकायत दर्ज करने से नुकसान कम किया जा सकता है और अपराधियों की पहचान संभव होती है।
यह जागरूकता सत्र न केवल पॉवरग्रिड परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है — साइबर सुरक्षा सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
सतर्क रहें, सुरक्षित रहें
पॉवरग्रिड का यह आयोजन दिखाता है कि सुरक्षा सिर्फ सिस्टम की नहीं, सोच की भी होती है।
डिजिटल युग में, हर व्यक्ति को अपनी ऑनलाइन जानकारी की सुरक्षा करनी होगी — क्योंकि एक छोटी सी चूक बड़ी साइबर चुनौती बन सकती है।
(Cyber Security Awareness Month 2025) जैसे अभियानों से यह उम्मीद की जा सकती है कि भारत का हर नागरिक “स्मार्ट यूजर” के साथ-साथ “सुरक्षित यूजर” भी बने।


