सीजी भास्कर, 29 अक्टूबर। एक बार फिर धरती के भीतर ‘सोने की लकीर’ (Rajasthan Gold Reserve) मिलने से हलचल मच गई है। वैज्ञानिकों की टीम ने हालिया सर्वेक्षण में जिस क्षेत्र को चिन्हित किया है, वहां पीली धातु के साथ कई कीमती खनिजों के होने की संभावना जताई गई है। प्रारंभिक रिपोर्ट ने सरकार और खनन कंपनियों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
दरअसल, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने राजस्थान के आदिवासी बहुल बांसवाड़ा जिले में लगातार तीसरी बार सोने का भंडार मिलने की पुष्टि की है। जांच में जिले के कांकरिया इलाके के चार गांवों के लगभग तीन किलोमीटर क्षेत्र में 1.20 टन सोने के भंडार का अनुमान लगाया गया है। इसके साथ ही तांबा, कोबाल्ट और अन्य खनिजों के मिलने के भी संकेत हैं।
जीएसआइ की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार ने क्षेत्र में गहन सर्वेक्षण (Detailed Exploration) करवाने का निर्णय लिया है। इसके लिए निजी कंपनियों से आवेदन मांगे गए हैं। तीन नवंबर को आवेदन खोले जाएंगे और सर्वाधिक बोली लगाने वाली कंपनी को सर्वेक्षण का लाइसेंस जारी किया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, कांकरिया, देलवाड़ा रावना, देलवाड़ा और डूंगरियापाड़ा क्षेत्रों में अब विस्तृत सर्वे किया जाएगा, जो लगभग तीन साल तक चलेगा। प्रारंभिक जांच में 1.20 टन सोने के साथ एक हजार टन तांबे और कोबाल्ट के भंडार की संभावना जताई गई है।
बता दें, इससे पहले भी बांसवाड़ा के भुकिया और जगपुरा क्षेत्रों में जीएसआइ को 11.48 करोड़ टन सोने (Rajasthan Gold Reserve) के भंडार के संकेत मिले थे, हालांकि वहां अभी तक वाणिज्यिक खनन शुरू नहीं हो पाया है। नए अनुमान के बाद राजस्थान कर्नाटक (हुट्टी और कोलार गोल्ड फील्ड्स) के बाद देश का दूसरा प्रमुख स्वर्ण उत्पादक राज्य बन सकता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान की 25% से अधिक हिस्सेदारी तय मानी जा रही है।
(Rajasthan Gold Reserve) बढ़ेंगे रोजगार और निवेश के अवसर
बांसवाड़ा अरावली पर्वतमाला से जुड़ा क्षेत्र है, जहां पांच हजार साल पुरानी भूगर्भीय चट्टानें मौजूद हैं। यह क्षेत्र पहले से मार्बल और अन्य खनिजों के खनन के लिए प्रसिद्ध रहा है। अब सोने का भंडार मिलने से यहां स्थानीय रोजगार, निवेश और औद्योगिक विकास के नए अवसर खुलेंगे।


