सीजी भास्कर, 30 अक्टूबर। भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम दोनों ही सोलह कलाओं से परिपूर्ण हैं। भगवान श्रीराम जैसे मर्यादा पुरुषोत्तम न पहले हुए और न आगे होंगे। हिंदू समाज में बढ़ते मतांतरण पर चिंता व्यक्त करते हुए स्वामी रामभद्राचार्य ने अपने हालिया बयान (Ram Bhadracharya Statement) में कहा कि अब धर्म परिवर्तन को रोकना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अगर हिंदू समाज समय रहते नहीं जागा, तो आने वाले वर्षों में उसे विकट परिस्थितियों से गुजरना पड़ सकता है।
पेंड्रा के हाईस्कूल मैदान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि यह कथा भारत माता के वीर सपूतों को समर्पित है, जिन्होंने माओवादियों से संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि भारत में हाल के वर्षों में धारा 370 हटना, तीन तलाक कानून लागू होना और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण जैसे ऐतिहासिक निर्णय धार्मिक जागरण के प्रतीक हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि जितनी तेजी से समाज में मतांतरण की घटनाएं बढ़ रही हैं, उतनी ही आवश्यकता धर्म रक्षा के संकल्प की है। स्वामी ने अपने वक्तव्य (Ram Bhadracharya Statement) में कहा कि जिसकी कथनी और करनी में अंतर हो, ऐसे व्यक्ति को आदर्श नहीं माना जा सकता।
उन्होंने बताया कि अब तक वे 275 से अधिक ग्रंथों की रचना कर चुके हैं और निरंतर अध्ययन व लेखन ही उनकी प्रेरणा है। स्वामी ने दुख जताया कि आज के समय में भागवत कथा की उपेक्षा पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है, जबकि यही ग्रंथ समाज को धर्म और नीति का मार्ग दिखाता है। कथा के समापन पर आयोजक समिति ने स्वामी रामभद्राचार्य का पुष्पमालाओं से भव्य सम्मान किया। भक्तों ने चरणपादुका की पूजा कर आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर आशीष केसरी, अनिल आसानी, डिंपी छाबरिया, विकास केसरी, रविंद्र वासनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मतांतरण पर स्वामी का संदेश
पेंड्रा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दौरान स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि हिंदू समाज में मतांतरण की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने अपने (Ram Bhadracharya Statement) में कहा कि धर्म की रक्षा केवल साधु-संतों की नहीं बल्कि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। स्वामी ने कहा कि राम मंदिर निर्माण और तीन तलाक कानून जैसे निर्णय धर्म जागरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि समाज में धार्मिक एकता और आस्था को सशक्त बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।


