सीजी भास्कर, 3 नवंबर। छत्तीसगढ़ ने अपने 25 वर्षों के विकास सफर में ग्रामीण भारत के सपनों को सड़क से जोड़ दिया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (Rural Connectivity Mission) के तहत राज्य के हर कोने में सड़कों का ऐसा नेटवर्क तैयार हुआ है, जिसने गांवों की तस्वीर बदल दी है। राज्य निर्माण से पहले जहां ग्रामीण इलाकों में महज़ 4,200 किलोमीटर सड़कें थीं, वहीं अब यह आंकड़ा 40 हजार किलोमीटर के पार पहुंच गया है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा वर्ष 2000 में शुरू की गई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना देशभर में ग्रामीण परिवर्तन की धुरी बनी। इसी योजना ने छत्तीसगढ़ को ग्रामीण समृद्धि की दिशा में मजबूत आधार दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्योत्सव के दौरान छत्तीसगढ़ में ग्रामीण सड़कों के विस्तार (Rural Connectivity Mission) की सराहना करते हुए कहा कि, “राज्य निर्माण के शुरुआती दिनों में कई गांवों तक पहुंचना मुश्किल था। आज 40 हजार किमी लंबी सड़कों ने गांव-गांव को जोड़ा है, यह प्रगति का प्रतीक है।”
ग्रामीण सड़कों के मजबूत नेटवर्क ने सुशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को नई दिशा दी है। किसानों के लिए खेतों से मंडी तक की दूरी अब आसान हो गई है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Rural Connectivity Mission) के माध्यम से अब राशन, पोषण आहार और दवाइयां भी समय पर पहुंचने लगी हैं।
राज्य के वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में इस योजना ने अभूतपूर्व बदलाव लाया है। लगभग 12,459 किलोमीटर सड़कों के निर्माण से 3,853 बसाहटें मुख्यधारा से जुड़ी हैं। इससे आजीविका, शिक्षा और सुरक्षा के नए रास्ते खुले हैं।
राज्य के पहले 16 वर्षों में 32 हजार किलोमीटर पक्की सड़कें और 426 वृहद पुल बनाए गए। अब तक योजना के तहत 8,310 सड़कों और 82 पुलों का कार्य पूरा हो चुका है। चौथे चरण में सरकार जनजातीय और विशेष पिछड़ी जनजाति बहुल क्षेत्रों में 8,000 किमी सड़कों के निर्माण का लक्ष्य लेकर चल रही है।
उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि, “मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को छत्तीसगढ़ सड़कों के माध्यम से साकार कर रहा है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना और प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत हर दूरस्थ गांव को सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा।” ग्रामीण सड़कों से अब न केवल विकास की रफ्तार बढ़ी है, बल्कि गांवों में जीवन की दिशा भी बदली है। छत्तीसगढ़ का यह सफर सड़कों के ज़रिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते भारत की मजबूत कहानी कहता है।


