सीजी भास्कर, 11 नवंबर। छत्तीसगढ़ में (Poor Road Condition) सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर चल रहे मामले की सुनवाई में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh Roads Condition Case) ने राज्य शासन को कड़ी फटकार लगाई है। शासन की ओर से शपथ पत्र प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए ₹1,000 का जुर्माना लगाया (Fine Imposed by High Court) है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा (Chief Justice Ramesh Sinha) और न्यायमूर्ति की डिवीजन बेंच ने यह आदेश सुनाया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि दिसंबर के पहले सप्ताह में अगली सुनवाई से पहले शासन को सभी सड़कों की स्थिति और प्रगति की अद्यतन रिपोर्ट पेश करनी होगी।
रतनपुर-केंदा रोड की दुर्दशा पर जवाब मांगा
अदालत ने विशेष रूप से रतनपुर-केंदा मार्ग (Ratanpur-Kenda Road) की बदहाली पर शासन से विस्तृत जवाब मांगा है। राज्य सरकार की ओर से दायर रिपोर्ट में बताया गया कि रतनपुर-सेंदरी रोड का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जबकि रायपुर रोड (Raipur Road Construction) का 70 प्रतिशत काम समाप्त हो गया है और अगले 15 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर भी चर्चा
लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से बताया गया कि तुर्काडीह, सेंदरी, रानीगांव, मलनाडीह और बेलतरा में पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए फुट ओवरब्रिज (Foot Overbridge Project) बनाए जा रहे हैं। पहले इसकी अनुमानित लागत 17.95 करोड़ रुपये थी, जो अब घटकर 11.38 करोड़ रह गई है। संयुक्त निरीक्षण पूरा हो चुका है और टेंडर प्रक्रिया शुरू होने वाली है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाईवे (NH-49) की खस्ता हालत पर नाराजगी जताई और पूछा कि सड़क की मरम्मत कब तक पूरी होगी। अदालत ने कहा कि लोक निर्माण विभाग की मौन स्थिति (PWD Inaction) और निष्क्रियता चिंताजनक है।
कोर्ट ने टिप्पणी की
बार-बार दिए जा रहे शपथ पत्रों से उद्देश्य पूरे नहीं हो रहे। स्थिति सुधारने के लिए अब ठोस कदम उठाना जरूरी है। इसके साथ ही, रायपुर-बिलासपुर मुख्य सड़क पर पावर प्लांटों की राख फैलने (Fly Ash Issue) पर भी अदालत ने सख्त नाराजगी जताई और मुख्य सचिव (Chief Secretary) से इस पर जवाब मांगा है।





