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Home » Teachers Gradeation Case: ढाई लाख शिक्षकों को बढ़ी सैलरी का लाभ नहीं, हाईकोर्ट ने 1188 याचिकाएं की खारिज

Teachers Gradeation Case: ढाई लाख शिक्षकों को बढ़ी सैलरी का लाभ नहीं, हाईकोर्ट ने 1188 याचिकाएं की खारिज

By Newsdesk Admin 27/11/2025
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सीजी भास्कर, 27 नवंबर | Teachers Gradeation Case के प्रमुख फैसले में राज्य हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि संविलियन से पहले शिक्षाकर्मी स्कूल शिक्षा विभाग के दायरे में नहीं आते थे, इसलिए 10 साल सेवा पूरी करने के बाद ग्रेडेशन का लाभ देने का कोई आधार नहीं बनता। जस्टिस एन.के. व्यास ने लगभग 1188 याचिकाएं एक साथ खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि सेवा अवधि की गिनती 1 जुलाई 2018 से ही मानी जाएगी।

Contents
ग्रेडेशन विवाद: 2017 के आदेश और शिक्षकों की दलीलेंसंविलियन नीति का प्रभाव: सरकार ने कहा—पहले पंचायत कर्मचारी थेसरकार का पक्ष मजबूत: ग्रेडेशन की शर्तें पूरी नहीं कर पाए शिक्षकअगर याचिकाएं मंजूर होतीं, तो सरकार को देना पड़ता करोड़ों रुपएकोर्ट का संदेश स्पष्ट: सेवा अवधि संविलियन से गिनी जाएगी

ग्रेडेशन विवाद: 2017 के आदेश और शिक्षकों की दलीलें

शिक्षकों का कहना था कि वे 10 साल सेवाकाल पूरा कर चुके हैं, इसलिए Pay Upgradation का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने 2017 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि तय समय बीत जाने के बाद विभाग ने उनका हक रोक लिया। कई याचिकाकर्ताओं ने अतिरिक्त रूप से ‘सोना साहू केस’ का संदर्भ दिया, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि उस मामले और इस मामले की परिस्थितियों में समानता नहीं है।

संविलियन नीति का प्रभाव: सरकार ने कहा—पहले पंचायत कर्मचारी थे

राज्य की ओर से पेश तर्क में कहा गया कि शिक्षाकर्मी शुरुआत में पंचायत विभाग के तहत ग्रेड-3, ग्रेड-2 और ग्रेड-1 के रूप में नियुक्त किए गए थे। उनकी सेवा नियंत्रक जनपद पंचायत थी, न कि राज्य सरकार।
हाईकोर्ट ने भी माना कि Service Integration से पहले उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं माना जा सकता। इसलिए संविलियन पूर्व अवधि को ग्रेडेशन के लिए आधार नहीं बनाया जा सकता।

सरकार का पक्ष मजबूत: ग्रेडेशन की शर्तें पूरी नहीं कर पाए शिक्षक

कोर्ट ने यह भी कहा कि 10 मार्च 2017 के सर्कुलर में साफ है कि ग्रेडेशन उन्हीं को मिलेगा जो 10 साल की अनिवार्य सेवा पूरी करते हैं। चूंकि संविलियन 2018 में हुआ, इसलिए याचिकाकर्ता 10 साल पूरे होने की शर्त को पूरा नहीं कर रहे। सरकार के अनुसार शिक्षाकर्मियों को समयमान वेतनमान 7 वर्ष में दिया गया था और 2014 में समकक्ष वेतनमान भी मिला था, लेकिन Career Progression का लाभ वे दावा नहीं कर सकते।

अगर याचिकाएं मंजूर होतीं, तो सरकार को देना पड़ता करोड़ों रुपए

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यदि कोर्ट शिक्षकों के पक्ष में निर्णय देता, तो सरकार को हर शिक्षक को ₹3.5 लाख से ₹15 लाख तक अतिरिक्त राशि देनी पड़ती।
क्लास-3 से क्लास-2 पे स्केल में बड़ा अंतर होने के कारण सबसे अधिक वित्तीय भार नीचे श्रेणी के शिक्षकों पर आता। उदाहरण के लिए—यदि कोई शिक्षक 2005 में नियुक्त हुआ, तो 2015 में उसे ग्रेडेशन मिल जाता, जिससे उसकी सैलरी में हर महीने हजारों रुपए का अंतर आता।

कोर्ट का संदेश स्पष्ट: सेवा अवधि संविलियन से गिनी जाएगी

हाईकोर्ट ने अंत में कहा कि संविलयन नीति खुद स्पष्ट है—शिक्षाकर्मी केवल संविलियन तिथि से ही सरकारी शिक्षक माने जाएंगे। इससे पहले की सेवा, चाहे कितने साल की क्यों न हो, ग्रेडेशन का आधार नहीं बन सकती। इसी कारण कोर्ट ने सभी 1188 याचिकाओं को खारिज कर दिया और मामले को अंतिम रूप से निपटा दिया।

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Newsdesk Admin 27/11/2025
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