सीजी भास्कर Rahul Gandhi FIR Issue: दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गांधी, सोनिया गांधी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज होने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। यह कार्रवाई ईडी की शिकायत के आधार पर की गई बताई जा रही है, लेकिन कांग्रेस नेताओं के अनुसार यह पूरी कवायद एक बड़े राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है। पार्टी का दावा है कि यह कदम उस समय उठाया गया है जब राहुल गांधी लगातार “वोट चोरी” जैसे संवेदनशील मुद्दे को सामने ला रहे थे।
- CWC सदस्यों ने BJP पर साधा निशाना, कहा—‘जो सवाल पूछे जा रहे हैं, उन्हीं का जवाब FIR के रूप में दिया जा रहा’
- Rahul Gandhi FIR Issue: राहुल पर लगातार निशाना, कांग्रेस बोली—‘यह कहानी 2014 से शुरू हुई थी’
- ‘SIR’ को लेकर राहुल का अभियान, विपक्ष को साथ लाने की कोशिश भी नाराजगी की वजह बताई गई
- Rahul Gandhi FIR Issue: देशभर में SIR की स्थिति, राजनीतिक बहस को और तीखा बना रही
CWC सदस्यों ने BJP पर साधा निशाना, कहा—‘जो सवाल पूछे जा रहे हैं, उन्हीं का जवाब FIR के रूप में दिया जा रहा’
कांग्रेस वर्किंग कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों ने रविवार को हुई आंतरिक बैठक में स्पष्ट आरोप लगाया कि यह FIR सिर्फ एक “सियासी प्रतिक्रिया” है। उनका कहना है कि राहुल गांधी ने हाल में 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची में किए जा रहे बड़े बदलावों को “वोट चोरी” करार दिया था, जिसके बाद यह कार्रवाई अचानक तेज हो गई।
पार्टी सदस्यों के मुताबिक, मुद्दा सिर्फ आर्थिक अपराध का नहीं है, बल्कि उस आवाज़ को दबाने का है, जो लगातार चुनावी प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर रही है।
Rahul Gandhi FIR Issue: राहुल पर लगातार निशाना, कांग्रेस बोली—‘यह कहानी 2014 से शुरू हुई थी’
पार्टी नेताओं ने यह भी याद दिलाया कि नेशनल हेराल्ड केस 2014 में सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद से राजनीतिक विवादों में रहा है। कांग्रेस का मानना है कि केंद्र का यह “पुराना हथियार” तब सक्रिय किया जाता है जब राहुल गांधी किसी बड़े मुद्दे को राष्ट्रीय बहस तक ले आते हैं।
उनके अनुसार, भूमि अधिग्रहण बिल, नोटबंदी और कृषि कानूनों पर भी राहुल ने जैसे ही तेज सवाल उठाए, वैसे ही राजनीतिक दबाव और जांच एजेंसियों की गतिविधियां बढ़ गई थीं।
‘SIR’ को लेकर राहुल का अभियान, विपक्ष को साथ लाने की कोशिश भी नाराजगी की वजह बताई गई
पार्टी सूत्रों के अनुसार, हाल में राहुल गांधी ने SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर एक विस्तृत अभियान शुरू किया था। उनका दावा था कि मतदाता सूचियों में व्यापक बदलावों से चुनावी पारदर्शिता प्रभावित हो रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल न सिर्फ इस मुद्दे को आगे बढ़ा रहे हैं, बल्कि उन्होंने विपक्ष को भी इसके खिलाफ संयुक्त रूप से खड़ा होने का संदेश दिया है। यही वजह है कि FIR को एक “तुरंत प्रतिक्रिया” माना जा रहा है, ताकि यह नैरेटिव ज्यादा दूर न जा सके।
Rahul Gandhi FIR Issue: देशभर में SIR की स्थिति, राजनीतिक बहस को और तीखा बना रही
SIR प्रक्रिया इस समय छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित तीन केंद्रशासित प्रदेशों—अंडमान व निकोबार, लक्षद्वीप और पुडुचेरी—में चल रही है।
विशेष संशोधन की यह कवायद वैसे तो चुनाव आयोग द्वारा की जाती है, लेकिन राहुल गांधी के “वोट चोरी” वाले आरोपों के बाद अब यह मुद्दा राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हो गया है। कांग्रेस का कहना है कि दिल्ली में 14 दिसंबर को होने वाली उनकी रैली इस मसले को राष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा देगी।



