सीजी भास्कर, 14 मई : चंद रुपयों के कमीशन और चंद दिनों के लालच में आकर अपने बैंक खाते (Supela Bandhan Bank Fraud) दूसरों को सौंपने वाले स्थानीय लोग अब बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं। दुर्ग पुलिस ने जिले में एक बड़ा अभियान चलाते हुए साइबर ठगी की रकम को छिपाने और ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे 362 संदिग्ध ‘म्यूल’ (Mule) खाताधारकों के खिलाफ सामूहिक रूप से एफआईआर (FIR) दर्ज की है। यह पूरी कार्रवाई भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित समन्वय पोर्टल और पुलिस मुख्यालय से मिले पुख्ता इनपुट के बाद की गई है।
कैसे काम करता है यह जाल Supela Bandhan Bank Fraud
दरअसल, साइबर ठग (Supela Bandhan Bank Fraud) देश के अलग-अलग कोनों से मासूम लोगों को डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी या टास्क पूरा करने के नाम पर ठगते हैं। ठगी की इस रकम को पुलिस की नजरों से बचाने के लिए वे सीधे अपने खातों में नहीं मंगाते, बल्कि ग्रामीण या कम पढ़े-लिखे युवाओं, मजदूरों को चंद पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवा लेते हैं। इन्हीं खातों को तकनीकी भाषा में ‘लेयर-1 म्यूल खाते’ कहा जाता है। ठगी का पैसा सबसे पहले इन्हीं खातों में आता है और कुछ ही मिनटों के भीतर इसे दूसरे खातों में ट्रांसफर कर या एटीएम के जरिए निकाल लिया जाता है।
सुपेला के बंधन बैंक में खुला खेल, 172 पर केस
पुलिस जांच में सबसे चौंकाने वाला मामला सुपेला क्षेत्र से सामने आया है। सुपेला पुलिस ने जब स्थानीय बंधन बैंक के संदिग्ध खातों की कुंडली खंगाली, तो पता चला कि देश के अलग-अलग राज्यों से हुई ठगी का पैसा सीधे इन खातों में लैंड कर रहा था। साल 2024 से लेकर 2026 के बीच इन खातों से करोड़ों रुपयों का अवैध लेनदेन किया गया और बाद में रकम को अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। सुपेला पुलिस ने इस धोखाधड़ी में शामिल 172 खाताधारकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 318(3) और 318(4) के तहत जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया है।
उतई और पुरानी भिलाई में भी फैला था नेटवर्क
ठगों (Supela Bandhan Bank Fraud) का यह जाल केवल सुपेला तक सीमित नहीं था। उतई थाना क्षेत्र के अंतर्गत संचालित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) के खातों की जब जांच की गई, तो वहां भी ठगी के पैसे का बड़ा ट्रांजेक्शन मिला। इस मामले में पुलिस ने 30 खाताधारकों को नामजद कर उनके खिलाफ जांच शुरू कर दी है। इसी तरह, पुरानी भिलाई क्षेत्र में स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खातों ने भी पुलिस को हैरान किया। यहां साइबर क्राइम की रकम का राजफाश होने के बाद 160 खाताधारकों पर अपराध दर्ज किया गया है।
चंद रुपयों के लिए न बेचें अपनी ईमानदारी
इस बड़ी कार्रवाई के बाद दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों और विशेषकर युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के बहकावे में आकर, या कमीशन के लालच में अपना पासबुक, एटीएम कार्ड, आधार या पैन कार्ड किसी को न सौंपे। अगर आपके खाते से किसी भी प्रकार का संदिग्ध लेनदेन होता है, तो कानूनन पहली जिम्मेदारी आपकी होगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन 362 खाताधारकों से अब कड़ाई से पूछताछ की जाएगी ताकि उन मुख्य साइबर अपराधियों तक पहुंचा जा सके जो पर्दे के पीछे बैठकर यह पूरा खेल चला रहे हैं।



