Period Temples in India: भारत में जहाँ सामान्य रूप से मासिक धर्म के दौरान पूजा-पाठ पर सामाजिक या धार्मिक पाबंदियाँ देखने को मिलती हैं, वहीं कुछ स्थान ऐसे भी हैं जहाँ महिलाएँ पीरियड्स में भी गर्भगृह तक पहुँच सकती हैं। इन मंदिरों की मान्यताएँ, पुरानी परंपराएँ और देवी से जुड़ी लोककथाएँ इन्हें बेहद खास बनाती हैं। यहाँ पूजा की व्यवस्था से लेकर उत्सवों तक, महिलाओं की भूमिका प्रमुख रूप से स्वीकार की जाती है।
Period Temples in India: कोयंबटूर का मंदिर जहाँ ‘भैरागिनी’ ही निभाती हैं पूजा की जिम्मेदारी
तमिलनाडु के कोयंबटूर से कुछ दूरी पर स्थित मां लिंग भैरवी मंदिर अपनी अलग परंपराओं के लिए जाना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि यहाँ पूजा और सभी अनुष्ठान महिलाओं द्वारा संचालित होते हैं।
पीरियड्स के दौरान भी यहाँ प्रवेश पर कोई रोक नहीं होती, और गर्भगृह में पूजा करने वाली महिलाओं को ‘भैरागिनी’ कहा जाता है। देवी की मूर्ति के स्थान पर एक चपटा, लम्बा पत्थर पूजनीय है, जिसे स्त्री-ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
Period Temples in India: महिलाओं का सबरीमाला कहे जाने वाला अनोखा धाम
केरल के दक्षिणी हिस्से में स्थित यह मंदिर महिलाओं की धार्मिक स्वतंत्रता और विशिष्ट अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध है। पोंगल उत्सव के दौरान 10-11 दिनों तक केवल महिलाएँ ही पूजा कर सकती हैं और इस अवधि में पुरुषों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहता है।
यही वजह है कि इसे कई लोग “Women’s Sabarimala” भी कहते हैं। यहाँ की परंपरा पीढ़ियों से वैसी ही चली आ रही है, जिसे स्थानीय लोग देवी की स्वीकृति मानते हैं।
Mannarasala Temple: नाग देवता के आशीर्वाद और मातृ परंपरा की कहानी
अलप्पुझा जिले का मन्नारसला नागराज मंदिर महिलाओं से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का एक सुंदर उदाहरण है। यहाँ की मुख्य पुजारिन, जिन्हें ‘मन्नारसला अम्मा’ कहा जाता है, मंदिर की संपूर्ण व्यवस्था संभालती हैं।
मान्यता है कि कभी एक ब्राह्मण महिला को नाग के आशीर्वाद से पुत्र प्राप्त हुआ था। उसी समय से मंदिर की जिम्मेदारी महिलाओं को सौंपी गई। पीरियड्स में भी यहाँ पूजा और दर्शन की अनुमति रहती है।
Kumari Amman Temple: कन्याकुमारी का वह धाम जहाँ गर्भगृह केवल महिलाओं के लिए खुला है
भारत के दक्षिणी छोर पर स्थित कुमारी अम्मन मंदिर कन्याकुमारी के धार्मिक, सांस्कृतिक और मिथकीय इतिहास का हिस्सा है। यह मंदिर देवी के कुमारी स्वरूप को समर्पित है। गर्भगृह में प्रवेश का अधिकार मुख्य रूप से महिलाओं को दिया जाता है, जबकि पुरुषों के लिए कुछ सीमाएँ लागू हैं।
यह मंदिर ब्रह्मचर्य, संकल्प और ऊर्जा की पवित्रता का प्रतीक माना जाता है, और यहाँ मासिक धर्म के दौरान प्रवेश को भी प्रतिबंधित नहीं किया जाता।
ये मंदिर क्यों हैं खास?—आस्था की वो परंपराएँ जो समाज को नई दिशा देती हैं
इन चारों मंदिरों की विशेषता केवल यह नहीं है कि यहाँ पीरियड्स में भी महिलाएँ पूजा कर सकती हैं। खास बात यह है कि इन स्थलों पर देवी-ऊर्जा, स्त्री शक्ति और मातृ परंपरा को सर्वोपरि रखा गया है।
यह उन सामाजिक अवधारणाओं को चुनौती देता है, जो मासिक धर्म को अशुद्ध मानती हैं। यहाँ की परंपराएँ यह संदेश देती हैं कि प्रकृति का यह चक्र पवित्र है, और स्त्री-ऊर्जा किसी भी धार्मिक कृत्य के लिए बाधा नहीं है।





