सीजी भास्कर 11 दिसम्बर कांकेर: कांकेर जिले के दूरस्थ और माओवाद-प्रभावित इलाकों से आने वाले युवाओं के लिए यह साल किसी वरदान से कम नहीं रहा। Mawa Model Success का असर अब जमीन पर साफ दिखने लगा है। इन्हीं युवाओं में से वर्तिका काडियाम का नाम पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस आरक्षक भर्ती में उनका चयन न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण है।
मुफ्त कोचिंग से खुला भविष्य का दरवाज़ा
वर्तिका काडियाम कहती हैं कि यदि Mawa Model Coaching का मार्गदर्शन न मिलता, तो शायद सरकारी नौकरी का सपना अधूरा रह जाता। उनकी तरह इस बार कुल 43 अभ्यर्थियों का चयन पुलिस आरक्षक के पद पर हुआ है—ये वही युवा हैं, जो वर्षों तक नक्सलियों की दहशत में पले-बढ़े लेकिन हार मानने के बजाय आगे बढ़ना चुना।
“मावा मोदोल” क्या है और कैसे बदल रहा है लाइफ-ट्रैक
मावा मोदोल जिला प्रशासन की एक अनोखी पहल है, जहाँ पूरी तरह निशुल्क कोचिंग की सुविधा दी जाती है। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ Career Guidance , डिजिटल लाइब्रेरी, मॉक टेस्ट और विशेषज्ञ शिक्षकों का सहयोग मिलता है।
“मावा मोदोल” शब्द गोंडी भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है—“मेरी जड़, मेरा भविष्य”। इस नाम की तरह ही इसका उद्देश्य भी युवाओं को जड़ों से जोड़ते हुए उन्हें एक सुरक्षित और स्थिर भविष्य देना है।
प्रशासन की पहल को मिली बड़ी सफलता
कांकेर कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर ने सभी चयनित युवाओं और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं। उनका कहना है कि Mawa Model Initiative सिर्फ एक कोचिंग सेंटर नहीं, बल्कि उन युवाओं के लिए उम्मीद का पुल है, जो कभी मुख्यधारा से दूर थे।
कलेक्टर ने यह भी बताया कि इस पहल का लक्ष्य है—माओवाद-प्रभावित इलाकों के युवाओं को एक मजबूत प्लेटफॉर्म देना, जहाँ वे अपने जीवन में नए अवसर ढूंढ सकें।
मावा मोदोल का मुख्य उद्देश्य
इस पहल की सबसे बड़ी ताकत है कि यह उन युवाओं को जोड़ती है, जिनके पास संसाधनों की कमी थी। यहां मिलने वाली मुफ्त कोचिंग और निरंतर मार्गदर्शन ने कई घरों में रोशनी फैलाई है। खासकर उन परिवारों में, जिनके बच्चे संघर्ष और असुरक्षा के बीच बड़े हुए।
मावा मोदोल का लक्ष्य स्पष्ट है—प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, आत्मविश्वास का विकास और युवाओं को सरकारी सेवाओं में स्थान दिलाना।

