Winter Weaves Jaipur : जयपुर में भारत की समृद्ध हैंडलूम और हस्तशिल्प परंपरा को समर्पित ‘विंटर वीव्स 2025’ प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। जयपुर क्लब में लगी इस विंटर हैंडलूम हेरिटेज प्रदर्शनी में देश के अलग-अलग कोनों से आए बुनकरों और शिल्पकारों ने अपनी कारीगरी को एक साझा मंच पर प्रस्तुत किया है।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ, सांस्कृतिक माहौल ने बांधा समां
प्रदर्शनी का उद्घाटन विशेष अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन अवसर पर मंत्रोच्चारण और पारंपरिक अनुष्ठानों ने पूरे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक गरिमा का वातावरण रचा, जहां कला-प्रेमियों की अच्छी मौजूदगी देखने को मिली।
कारीगरों की सदियों पुरानी कला को मिला सम्मान
आयोजक संस्था की संस्थापक शिल्पी भार्गव ने बताया कि विंटर वीव्स का मूल उद्देश्य मास्टर कारीगरों और पारंपरिक बुनकरों की विरासत को सम्मान देना है। प्रदर्शनी में क्यूरेटेड हैंडमेड वस्त्र, परिधान और होम-डेकोर आइटम रखे गए हैं, जो भारतीय टेक्सटाइल परंपरा की गहराई और विविधता को दर्शाते हैं।
पश्मीना से लेकर अजरख तक, हर स्टॉल में कहानी
प्रदर्शनी में हैंडवोवन और कढ़ाईदार पश्मीना शॉल, सर्दियों के लिए डिजाइन किए गए केप्स, जैकेट्स और फिरन, पारंपरिक सिल्क साड़ियां आकर्षण का केंद्र हैं। इसके साथ ही फुलकारी, अजरख और भुजोडी बुनाई के वस्त्र दर्शकों को भारतीय बुनाई शैलियों की यात्रा पर ले जाते हैं।
देश के कई राज्यों की बुनाई परंपराएं एक छत के नीचे
बिहार, छत्तीसगढ़, कश्मीर, हिमाचल, कुमाऊं और गुजरात से आए ऊनी हैंडलूम, कालीन और दरियां प्रदर्शनी की खास पहचान हैं। हर स्टॉल अपनी अलग कहानी, रंग और बनावट के साथ भारतीय शिल्प परंपरा की जीवंत झलक पेश कर रहा है।
कारीगरों और दर्शकों के बीच सीधा संवाद
आयोजकों के अनुसार, यह प्रदर्शनी सिर्फ बिक्री का मंच नहीं है, बल्कि कारीगरों और आम लोगों के बीच सीधा संवाद स्थापित करती है। इससे दर्शक हस्तशिल्प की वास्तविक मेहनत, मूल्य और सांस्कृतिक महत्व को करीब से समझ पाते हैं।





