Tansen Music Festival Gwalior : संगीत सम्राट तानसेन की धरती ग्वालियर में सोमवार से तानसेन संगीत समारोह की शुरुआत हो गई। 101वें आयोजन के साथ ही शहर एक बार फिर शास्त्रीय संगीत की साधना में डूब गया है, जहां अगले पांच दिनों तक राग, ताल और लय का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
समाधि स्थल से उठी सुरों की पहली लहर
आयोजन की शुरुआत तानसेन समाधि स्थल पर पारंपरिक शहनाई वादन, हरिकथा और मीलाद वाचन के साथ चादरपोशी से हुई। सुबह के इस आध्यात्मिक माहौल के बाद शाम होते-होते सुरों की महफिल ने पूरे परिसर को संगीत में सराबोर कर दिया।
इतिहास और कला का संगम बना मंच
मुख्य समारोह के लिए मंच को ग्वालियर किला स्थित चतुर्भुज मंदिर की थीम पर सजाया गया है। यहां औपचारिक उद्घाटन के बाद देश-विदेश से आए ख्यातिप्राप्त कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से तानसेन को स्वरांजलि अर्पित कर रहे हैं।
पांच दिन, कई मंच, अनगिनत राग
18 दिसंबर तक सुबह और शाम की संगीत सभाएं मुख्य स्थल पर आयोजित होंगी। 18 दिसंबर को बटेश्वर मंदिर परिसर में विशेष सभा होगी, जबकि 19 दिसंबर को सुबह तानसेन की जन्मस्थली बेहट और शाम को गूजरी महल में अंतिम प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
शास्त्रीय संगीत की राजधानी बना ग्वालियर
हर साल की तरह इस बार भी तानसेन समारोह ने ग्वालियर को शास्त्रीय संगीत की वैश्विक पहचान से जोड़ दिया है। शहर की गलियों से लेकर मंच तक, हर ओर सुरों की साधना और संगीत प्रेमियों की मौजूदगी इसे खास बना रही है।





