सीजी भास्कर, 16 दिसंबर। स्कूल शिक्षकों के बाद अब कालेज प्रोफेसरों (College Campus Dog Monitoring) की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग के नए निर्देशों के तहत अब कालेज और यूनिवर्सिटी कैंपस में घूम रहे आवारा कुत्तों की निगरानी की जवाबदेही सीधे प्राचार्यों और प्रोफेसरों पर तय की गई है। विभाग ने सभी शासकीय व निजी महाविद्यालयों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने के आदेश जारी किए हैं, जिन पर कैंपस में आवारा कुत्तों या मवेशियों से जुड़ी किसी भी घटना की पूरी जिम्मेदारी होगी।
आदेश (College Campus Dog Monitoring) के पालन को सुनिश्चित कराने के लिए नगर निगम और नगरपालिकाएं अपने-अपने क्षेत्र के कालेज प्राचार्यों को एक निर्धारित फार्मेट भेज रही हैं। इस फार्मेट में कालेज प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि कुत्तों की निगरानी के लिए किस अधिकारी को नोडल बनाया गया है और अब तक इस दिशा में क्या-क्या कार्रवाई की गई है।
नए निर्देशों के मुताबिक, यदि भविष्य में कालेज या यूनिवर्सिटी कैंपस में आवारा कुत्ते या मवेशी पाए जाते हैं, या उनसे संबंधित कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संस्थान के प्राचार्य और नियुक्त नोडल अधिकारी जिम्मेदार माने जाएंगे। ऐसे मामलों में नगर निगम से समन्वय स्थापित कर कुत्तों को हटवाने की जिम्मेदारी भी उन्हें ही निभानी होगी।
विभाग की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य स्तर पर डॉ. टी. जलजा नायर को इस पूरी व्यवस्था का प्रभारी नियुक्त किया गया है। साथ ही कालेजों के नोडल अधिकारियों को अपने नाम और मोबाइल नंबर के साथ डिस्प्ले बोर्ड कैंपस में लगाना होगा, जिसकी फोटो उच्च शिक्षा संचालनालय को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजनी अनिवार्य की गई है।
(College Campus Dog Monitoring) जूठन फेंकने पर सख्त रोक
नई गाइडलाइन में कैंपस और कैंटीन में खुले में खाद्य सामग्री फेंकने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, क्योंकि इससे आवारा जानवर आकर्षित होते हैं। इसके अलावा कालेज परिसरों की बाउंड्रीवाल दुरुस्त करने, छात्रों की सुरक्षा के लिए फर्स्ट एड बॉक्स रखने, पशु चिकित्सा विभाग की मदद से जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने और आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर 1100 का व्यापक प्रचार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।


