वोट चोरी के मुद्दे को लेकर आयोजित की गई कांग्रेस की रैली अब नए विवाद में घिरती नजर आ रही है। सामने आए एक वायरल वीडियो ने (Vote Theft Rally Controversy) को और हवा दे दी है, जिसमें खुद को रैली का हिस्सा बताने वाला व्यक्ति आंदोलन के उद्देश्य को लेकर असमंजस में दिखाई देता है।
सवालों में घिरे कथित कार्यकर्ता
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक व्यक्ति दावा करता है कि उसे रैली में शामिल होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन जब उससे रैली के मुद्दे या एसआईआर को लेकर सवाल किए जाते हैं, तो वह स्पष्ट जवाब नहीं दे पाता। यह (Viral Video Row) अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है।
मजदूरी के आधार पर भीड़ जुटाने का दावा
आरोप लगाए जा रहे हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजित रैलियों में शामिल कई लोग एक दिन की मजदूरी पर लाए गए थे। वीडियो में व्यक्ति यह भी कहता सुनाई देता है कि आने-जाने और रुकने की व्यवस्था स्थानीय पदाधिकारियों द्वारा की गई थी, जबकि आंदोलन का उद्देश्य उन्हें नहीं बताया गया।
बीजेपी का तीखा हमला
दिल्ली में हुई रैली के बाद इस मामले ने सियासी रंग ले लिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि रैली का मकसद (Political Protest Strategy) नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ माहौल तैयार करना था। आरोप यह भी लगाए गए कि रैली के दौरान मर्यादा के विपरीत नारेबाजी हुई।
संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव का आरोप
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं में यह दावा भी सामने आया है कि रैली के जरिए चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
वायरल वीडियो और आरोपों के बाद भी कांग्रेस की ओर से अब तक कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में (Vote Theft Rally Controversy) लगातार तूल पकड़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में इस पर और सियासी बयानबाजी होने की संभावना जताई जा रही है।





