सीजी भास्कर, 17 दिसंबर। संविदा नियुक्ति आदेश जारी कराने के बदले रिश्वत मांगने का एक और मामला सामने आया है। बहुउद्देशीय किसान उत्पादक सहकारी समिति में लेखापाल पद पर संविदा नियुक्ति के एवज में 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते सूरजपुर जिले के सहकारी निरीक्षक अभिषेक सोनी को एंटी करप्शन ब्यूरो अंबिकापुर (ACB Ambikapur Trap Case) की टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई आयुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं सूरजपुर कार्यालय में की गई।
एसीबी (Cooperative Inspector Bribery Case) से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी सहकारी निरीक्षक द्वारा कुल डेढ़ लाख रुपये की मांग की गई थी, जिसे बाद में घटाकर एक लाख और फिर 80 हजार रुपये पर सहमति बनी थी। तय समझौते के अनुसार प्रथम किस्त के रूप में 40 हजार रुपये की रिश्वत कार्यालय में ली जा रही थी, तभी एसीबी की टीम ने दबिश देकर आरोपी को धर दबोचा ।
इस मामले में ग्राम करसी निवासी शुभम जायसवाल (25) ने एसीबी अंबिकापुर में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि भारत सरकार के राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की योजना के तहत सूरजपुर जिले के रामानुजनगर, प्रेमनगर, सूरजपुर, नैयाथान और प्रतापपुर विकासखंडों में छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 के अंतर्गत पांच बहुउद्देशीय किसान उत्पादक सहकारी समितियों का गठन किया गया है।
इन समितियों में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, प्रबंधक और लेखापाल पदों पर तीन वर्षों के लिए संविदा नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही थी। शुभम जायसवाल ने मां समलेश्वरी बहुउद्देशीय कृषक उत्पादक सहकारी समिति मर्यादित, टुकुडांड में लेखापाल पद के लिए आवेदन किया था। पात्र सूची में नाम आने के बाद उन्होंने दक्षता परीक्षण, टाइपिंग टेस्ट और साक्षात्कार में भाग लिया।
आरोप है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद नियुक्ति आदेश जारी करने के लिए सहकारी निरीक्षक अभिषेक सोनी ने रिश्वत की मांग की (Sahkari Niyukti Rishwat Mamla)। पीड़ित द्वारा शिकायत के सत्यापन के बाद एसीबी ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया।
17 दिसंबर की रात लगभग 8:25 बजे जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की रकम अपने पास रखी, एसीबी टीम ने उसे मौके पर गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एसीबी की इस कार्रवाई से सरकारी और सहकारी विभागों में हड़कंप मच गया है।





