सीजी भास्कर, 21 दिसंबर। यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच रूस ने एक बार फिर दक्षिणी यूक्रेन के रणनीतिक (Russia Odesa Port Attack) रूप से महत्वपूर्ण ओडेसा बंदरगाह को निशाना बनाया है। यूक्रेन की आपातकालीन सेवा के अनुसार शुक्रवार देर रात बंदरगाह के बुनियादी ढांचे पर किए गए रूसी मिसाइल हमले में आठ लोगों की मौत हो गई,
जबकि 27 अन्य घायल हो गए। घायलों में कई लोग एक बस में सवार थे, जो हमले की चपेट में आ गई। रूस का ओडेसा बंदरगाह पर हमला (Russia Odesa Port Attack) काला सागर क्षेत्र में तनाव को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
आपातकालीन अधिकारियों ने बताया कि हमले के बाद बंदरगाह क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। पार्किंग स्थल में खड़े कई ट्रकों में आग लग गई और आसपास खड़ी कारें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। ओडेसा क्षेत्र के प्रमुख ओलेह किपर ने पुष्टि की कि बंदरगाह पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया था।
उनका कहना है कि यह हमला न केवल नागरिक बुनियादी ढांचे पर सीधा प्रहार है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती है। रूस का ओडेसा बंदरगाह पर हमला (Russia Odesa Port Attack) यूक्रेन की समुद्री आपूर्ति लाइनों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
हालांकि मास्को ने इस घातक हमले की खबरों की तत्काल पुष्टि नहीं की है। रूसी रक्षा मंत्रालय ने शनिवार सुबह जारी बयान में कहा कि पिछले दिन उसने उन ठिकानों को निशाना बनाया, जिनका उपयोग यूक्रेनी सशस्त्र बल परिवहन और भंडारण के लिए कर रहे थे।
बयान में यह भी दावा किया गया कि ऊर्जा सुविधाओं और कीव के युद्ध प्रयासों को समर्थन देने वाले बुनियादी ढांचे पर भी हमले किए गए हैं। रूसी पक्ष का कहना है कि ये हमले सैन्य उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किए गए, लेकिन यूक्रेन ने नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। इस पृष्ठभूमि में रूस का ओडेसा बंदरगाह पर हमला (Russia Odesa Port Attack) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
इस बीच यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने शनिवार को कहा कि यूक्रेनी ड्रोन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए एक रूसी तेल रिग, सैन्य गश्ती पोत और अन्य सुविधाओं को निशाना बनाया। बयान के अनुसार, रूसी गश्ती पोत ‘ओखोत्निक’ को उस समय निशाना बनाया गया, जब वह कैस्पियन सागर में एक तेल और गैस उत्पादन प्लेटफार्म के पास गश्त कर रहा था।
इसके अलावा कैस्पियन सागर में स्थित फिलानोव्स्की तेल और गैस क्षेत्र के एक ड्रिलिंग प्लेटफार्म को भी नुकसान पहुंचा है, जिसका संचालन रूसी तेल कंपनी लुकोइल करती है। नुकसान की वास्तविक सीमा का आकलन अभी जारी है, लेकिन दोनों पक्षों की कार्रवाइयों से संघर्ष और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।





