सीजी भास्कर, 21 दिसंबर। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को वित्त मंत्रालय और कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के संयुक्त ‘चिंतन शिविर’ की अध्यक्षता करते हुए विकसित भारत के दीर्घकालिक लक्ष्यों और रणनीतियों पर अधिकारियों के साथ व्यापक मंथन किया।
इस बैठक में कारपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2047 तक देश को समृद्ध, आत्मनिर्भर और समावेशी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने के लिए विकसित भारत के रोडमैप (Viksit Bharat Roadmap) को स्पष्ट दिशा देना रहा।
इस उच्चस्तरीय मंथन में वित्त मंत्रालय और कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के सचिवों के साथ-साथ केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के अध्यक्ष, तथा केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भी भाग लिया। वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने नीति निर्माण, कर सुधार और प्रशासनिक दक्षता से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।
चिंतन शिविर के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के प्रभावी उपयोग, प्रक्रियाओं को सरल बनाने, और विकसित भारत के रोडमैप (Viksit Bharat Roadmap) के अनुरूप वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।
इन सत्रों में विभागों के बीच बेहतर समन्वय, पारदर्शी और समावेशी वित्तीय सहायता, तथा डिजिटल उपकरणों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने माना कि तकनीक आधारित समाधान प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज, सरल और नागरिक-केंद्रित बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
वित्त मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि नीति निर्माण में नवाचार, जवाबदेही और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण जरूरी है, ताकि विकसित भारत के रोडमैप (Viksit Bharat Roadmap) को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कर प्रणाली में सरलता, कारोबारी सुगमता और पारदर्शिता से निवेश को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक विकास को गति मिलेगी। बैठक के अंत में यह सहमति बनी कि मंत्रालयों और विभागों के बीच निरंतर संवाद और समन्वय के माध्यम से विकसित भारत के लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से हासिल किया जाएगा।





