High Court Abortion Permission : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक गंभीर और संवेदनशील मामले में त्वरित हस्तक्षेप करते हुए छह माह की गर्भवती रेप पीड़िता को गर्भपात की अनुमति दे दी है। शीतकालीन अवकाश के दौरान विशेष रूप से सुनवाई कर कोर्ट ने पीड़िता के हित में निर्णय सुनाया।
मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दिया गया आदेश
एकलपीठ ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल एवं जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को निर्देश दिए कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में पीड़िता का गर्भपात कराया जाए। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि प्रक्रिया से पीड़िता के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा नहीं है।
रेप के बाद सामने आया गर्भधारण
मामला रायपुर जिले से जुड़ा है, जहां 16 वर्षीय नाबालिग को शादी का झांसा देकर आरोपी ने शारीरिक शोषण किया। समय के साथ किशोरी के शारीरिक बदलाव देख परिजनों को संदेह हुआ। चिकित्सकीय जांच में यह सामने आया कि पीड़िता करीब 25 सप्ताह की गर्भवती है ।
अवकाश के दिन गठित की गई विशेष बेंच
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने शीतकालीन अवकाश के बावजूद विशेष रूप से बेंच गठित कर सुनवाई की। अदालत ने माना कि ऐसे मामलों में देरी पीड़िता के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।
कोर्ट का स्पष्ट रुख: पीड़िता को मिले निर्णय का अधिकार
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दुष्कर्म पीड़िता को यह अधिकार मिलना चाहिए कि वह अपने भविष्य और गर्भावस्था को लेकर स्वयं निर्णय ले। अदालत ने कहा कि यह मामला केवल चिकित्सा का नहीं, बल्कि महिला की गरिमा और स्वायत्तता से भी जुड़ा है।
डीएनए सुरक्षित रखने के निर्देश
भविष्य की कानूनी प्रक्रिया और जांच को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने निर्देश दिए कि गर्भपात के दौरान भ्रूण का डीएनए सुरक्षित रखा जाए। साथ ही पूरी प्रक्रिया मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 के तहत दो पंजीकृत डॉक्टरों की निगरानी में की जाए।
अस्पताल प्रशासन को दी गई जिम्मेदारी
अदालत ने पीड़िता और उसके परिजनों को अस्पताल अधीक्षक एवं संबंधित चिकित्सकों से समन्वय कर सभी औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं। पीड़िता को निर्धारित तिथि पर अस्पताल में उपस्थित रहने को कहा गया है।


