Tele MANAS Mental Health Calls : देश में बदलती जीवनशैली और बढ़ते कार्य-दबाव का असर अब सीधे पारिवारिक रिश्तों पर दिखने लगा है। सरकारी मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल्स में 37 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं, जिनकी मुख्य शिकायत यही है कि पति नौकरी और जिम्मेदारियों में इतने उलझे रहते हैं कि घर और बच्चों के लिए समय ही नहीं बचता। यह स्थिति लंबे समय में रिश्तों को कमजोर कर रही है और मानसिक तनाव को बढ़ा रही है।
एकल परिवार और अकेलापन: साझा करने वाला कोई नहीं
कॉल करने वाली अधिकांश महिलाएं एकल परिवारों से हैं। उनका कहना है कि न तो भावनात्मक सहयोग मिल पाता है और न ही अपनी परेशानी खुलकर कहने का मौका। बच्चे भी पिता की मौजूदगी को तरस जाते हैं। ऐसे हालात में महिलाएं खुद को मानसिक रूप से टूटता हुआ महसूस करती हैं और मदद के लिए (Tele MANAS Mental Health Calls) का सहारा ले रही हैं।
इंदौर बना सबसे बड़ा कॉल सेंटर: 55% फोन यहीं से
मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन दो प्रमुख जिलों से संचालित हो रही है, जहां कुल कॉल्स में से करीब 55 प्रतिशत फोन इंदौर जिले से दर्ज किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शहरी जीवन की तेज रफ्तार, करियर की दौड़ और आर्थिक दबाव ने लोगों को भावनात्मक रूप से थका दिया है। इसका सीधा असर वैवाहिक और पारिवारिक संतुलन पर पड़ रहा है।
घरेलू जिम्मेदारियां और रिश्तों का तनाव
महिलाओं की शिकायतें सिर्फ पति तक सीमित नहीं हैं। घरेलू काम का बढ़ता बोझ, बच्चों की परवरिश, सास-ससुर से तालमेल और लगातार अपेक्षाएं—ये सभी मिलकर मानसिक परेशानी को गहरा कर रहे हैं। कई मामलों में रिश्तों की खटास अवसाद और चिड़चिड़ेपन में बदल रही है, जिस कारण (Mental Health Helpline India) पर संपर्क बढ़ रहा है।
पुरुष भी पीछे नहीं: 60% कॉल पुरुषों की
आंकड़े बताते हैं कि कुल कॉल्स में लगभग 60 प्रतिशत पुरुष भी शामिल हैं। पुरुषों की समस्याएं काम का दबाव, आर्थिक तनाव, नींद न आना और भविष्य की अनिश्चितता से जुड़ी हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि भावनाओं को दबाने की आदत पुरुषों को समय पर मदद लेने से रोकती है, जिससे मानसिक स्थिति और बिगड़ती है।
किन समस्याओं को लेकर लोग मदद मांग रहे हैं
हेल्पलाइन पर आने वाले फोन सिर्फ तनाव तक सीमित नहीं हैं। नींद की कमी, लगातार उदासी, घबराहट, बिना कारण डर, काम में मन न लगना, पढ़ाई का दबाव, नशे की आदत, चिड़चिड़ापन और रिश्तों में दूरी जैसी समस्याएं आम हो चुकी हैं। इन सभी मामलों में (Tele MANAS Mental Health Calls) के जरिए काउंसलिंग दी जा रही है।
क्यों जरूरी हो गई मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन
कोविड के बाद मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ीं। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञों की कमी और समाज में मानसिक बीमारी को लेकर झिझक के कारण लोग खुलकर मदद नहीं ले पाते। ऐसे में 24 घंटे उपलब्ध, गोपनीय और निश्शुल्क मानसिक सहायता सेवा लोगों के लिए एक सुरक्षित सहारा बनकर उभरी है।
रिश्तों को समय देना ही असली समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल काउंसलिंग ही नहीं, बल्कि परिवार को समय देना, संवाद बढ़ाना और भावनात्मक जरूरतों को समझना भी उतना ही जरूरी है। अगर समय रहते संतुलन नहीं बनाया गया, तो यह मानसिक संकट आने वाले वर्षों में और गहरा हो सकता है।





