सीजी भास्कर, 24 दिसंबर। कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र में हुई हिंसा और कथित धर्मांतरण के विरोध में बुधवार को सर्व-समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने छत्तीसगढ़ बंद (Chhattisgarh Bandh) का आह्वान किया। बंद का असर प्रदेश के कई जिलों में व्यापक रूप से देखने को मिला। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जगदलपुर और बालोद सहित कई शहरों में सुबह से ही दुकानें, बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। हालांकि कुछ जिलों में बंद का असर आंशिक या पूरी तरह बेअसर भी नजर आया।
कांकेर में स्थिति तनावपूर्ण
बंद के दौरान कांकेर जिले में स्थिति एक बार फिर तनावपूर्ण हो गई। आमाबेड़ा क्षेत्र के उसेली गांव में कथित रूप से धर्मांतरित महिला राम बाई तारम का घर तोड़ दिया गया। राम बाई का कहना है कि वह पिछले 5–6 वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रही हैं और हिंदू धर्म में वापस लौटने को तैयार नहीं हैं। इसी बात को लेकर गांव में विवाद बढ़ा और तोड़फोड़ की घटना सामने आई। महिला का आरोप है कि बीमारी के इलाज के दौरान उन्होंने धर्म परिवर्तन किया था और अब उसी वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
रायपुर में मारपीट व तोड़फोड़
राजधानी रायपुर में बंद (Chhattisgarh Bandh) के दौरान हिंसा की गंभीर घटनाएं सामने आईं। बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं पर आरोप है कि उन्होंने कटोरा तालाब स्थित ब्लिंकिट कार्यालय में घुसकर कर्मचारियों के साथ मारपीट की। लाठी-डंडों से की गई इस मारपीट का एक वीडियो CCTV कैमरे में कैद हो गया, जो बाद में सामने आया। घटना के दौरान डिलीवरी के काम में लगे कर्मचारियों के साथ कथित रूप से जबरन मारपीट की गई। इसके अलावा रायपुर के मैग्नेटो मॉल में भी हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा तोड़फोड़ किए जाने की खबर है।

रायपुर में हिंदू संगठनों के सदस्य, छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के कुछ प्रतिनिधियों के साथ मिलकर बंद को सफल कराने के लिए सड़कों पर उतरे। लाठी-डंडे लेकर निकले कार्यकर्ता दुकानदारों से प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील करते नजर आए। वहीं पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए रहा। अस्पताल, मेडिकल स्टोर और अन्य आपातकालीन सेवाओं को बंद से अलग रखा गया।
बस्तर में बंद का व्यापक असर
बस्तर संभाग के जगदलपुर में भी बंद का व्यापक असर देखने को मिला। कुछ दुकानदारों द्वारा दुकानें खोलने पर हिंदू संगठनों और व्यापारियों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद दुकानें बंद कर दी गईं। पूरे शहर में सन्नाटा पसरा रहा। दुर्ग और बिलासपुर में भी सुबह से ही बाजार बंद रहे और सड़कों पर आवाजाही कम नजर आई।
बलरामपुर में बंद का असर नहीं
हालांकि बंद का असर सभी जिलों में एक समान नहीं रहा। बलरामपुर–रामानुजगंज जिले में बंद लगभग बेअसर रहा। रामानुजगंज शहर में दुकानें और बाजार सामान्य रूप से खुले रहे, वहीं जिला मुख्यालय बलरामपुर में भी रोजमर्रा की गतिविधियां सामान्य बनी रहीं। लोगों ने अपने दैनिक कामकाज बिना किसी बाधा के जारी रखे।
बालोद में भी पूर्ण समर्थन
बालोद जिले में बंद (Chhattisgarh Bandh) का असर सबसे अधिक देखने को मिला। जिले में सुबह 7 बजे से ही संपूर्ण बंद रखा गया, जिसे व्यापारी समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला। बालोद मुख्यालय के साथ दल्लीराजहरा, डौंडीलोहारा, डौंडी, गुरुर, गुंडरदेही, अर्जुन्दा और पुरूर में बाजार पूरी तरह बंद रहे। कई स्थानों पर शराब दुकानों और सड़क निर्माण कार्यों को भी बंद कराया गया, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।
कुल मिलाकर कांकेर की घटना और धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर बुलाए गए छत्तीसगढ़ बंद (Chhattisgarh Bandh) ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और सामाजिक तनाव को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह शांति व्यवस्था बनाए रखते हुए हिंसक घटनाओं पर सख्ती से कार्रवाई करे और हालात को सामान्य बनाए।


