सीजी भास्कर, 27 दिसंबर। मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के कथावाचक पं. धीरेंद्र शास्त्री उर्फ बाबा बागेश्वर के रायपुर आगमन को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। धीरेंद्र शास्त्री छत्तीसगढ़ सरकार के शासकीय विमान से रायपुर पहुंचे, जिसके बाद उन्हें भिलाई ले जाया गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकारी विमान उपयोग (Government Plane Controversy) सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर चर्चा का केंद्र बन गया है।
इस दौरान माना थाना प्रभारी मनीष तिवारी द्वारा जूते और टोपी उतारकर बाबा के पैर छूने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद किसी ने इसे व्यक्तिगत आस्था बताया तो किसी ने वर्दी की मर्यादा और प्रशासनिक अनुशासन का सवाल खड़ा कर दिया। रायपुर एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने कहा कि संबंधित पुलिसकर्मी पूरी वर्दी में नहीं था और उसने जूते-टोपी उतार दिए थे, इसलिए फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
कांग्रेस ने सरकार पर किया हमला
दूसरी ओर, धीरेंद्र शास्त्री को शासकीय विमान सुविधा (Government Plane Controversy) दिए जाने पर विपक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया है। कांग्रेस ने इसे जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी बताते हुए कहा कि निजी धार्मिक आयोजन के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल नियमों के खिलाफ है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह सीधे-सीधे सरकारी खजाने की डकैती जैसा है।
वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस को हमेशा से ही हिंदू संतों और धर्म प्रचारकों से परेशानी रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि बाबा बागेश्वर की कथा में लाखों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं और सरकार ने केवल सुविधा प्रदान की है।
जानकारी के अनुसार, धीरेंद्र शास्त्री को लाने के लिए प्रदेश सरकार के एक मंत्री पहले उसी शासकीय विमान से सतना गए, फिर बाबा को लेकर रायपुर पहुंचे। वीडियो में तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब विमान से उतरते हुए नजर आ रहे हैं, जिससे विवाद और गहरा गया है।
भिलाई में चल रहा कार्यक्रम
दरअसल, भिलाई के जयंती स्टेडियम में पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हनुमंत कथा 25 दिसंबर से 29 दिसंबर तक आयोजित की जा रही है। इसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए वे रायपुर से भिलाई पहुंचे थे। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि धीरेंद्र शास्त्री किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं, ऐसे में निजी धार्मिक आयोजन के लिए सरकारी संसाधनों का उपयोग (Government Plane Controversy) कितना उचित है। मामला अब धार्मिक आस्था, प्रशासनिक मर्यादा और सरकारी जवाबदेही के बीच टकराव का प्रतीक बन गया है।


