सीजी भास्कर, 28 दिसंबर। प्रेमिका से मिलने सरहद पार पहुंचा अलीगढ़ का युवक बादल एक साल बाद पाकिस्तान की जेल (Badal Pakistan Jail Release) से रिहा हो गया है। 26 दिसंबर को उसे जेल से बाहर तो निकाल लिया गया, लेकिन फिलहाल वह अपने वतन भारत नहीं लौट पाया है। रिहाई के बाद उसे पाकिस्तान के एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है।
उसके वकील ने पाकिस्तान के गृह मंत्रालय में प्रार्थना-पत्र भेजकर जल्द भारत भेजने की मांग की है। इस खबर के बाद अलीगढ़ जिले के गांव खिटकारी नगला में उसके परिवार में उम्मीद और भावुकता का माहौल है।
बादल के पिता कृपाल सिंह मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। तीन संतानों में मझला बेटा बादल दिल्ली की एक एक्सपोर्ट कंपनी में सिलाई का काम करता था।
वर्ष 2022 में फेसबुक के जरिए उसकी दोस्ती पाकिस्तान के मंडी बहाउद्दीन क्षेत्र के माउंग गांव की सना रानी से हुई। बातचीत बढ़ी और भावनात्मक जुड़ाव इस कदर बढ़ा कि बादल ने बिना वीजा-पासपोर्ट सरहद पार करने का खतरनाक फैसला कर लिया।
पहली बार 2 जनवरी 2024 को वह सना से मिलने पाकिस्तान (Badal Pakistan Jail Release) गया, जहां पाकिस्तानी सैनिकों ने उसे पकड़कर भारतीय सुरक्षा बलों को सौंप दिया। इसके बावजूद उसने सबक नहीं लिया।
20 जुलाई 2024 को वह दूसरी बार फिर सरहद पार कर गया और इस बार भी सेना ने उसे वापस कर दिया। तीसरी बार 22 दिसंबर 2024 को वह दोबारा बिना वैध दस्तावेज पाकिस्तान पहुंच गया और सना के घर में रहा।
दो दिन बाद सना और उसकी मां ने उसे घर से निकाल दिया, लेकिन बादल गांव छोड़कर नहीं गया। वह वहीं नबाब असगर के यहां नौकरी करने लगा। बकरी चराते समय उसकी भाषा और बोलचाल से लोगों को शक हुआ, जिसके बाद 27 दिसंबर 2024 को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह प्रेमिका से मिलने आया था।
पाकिस्तान की विभिन्न एजेंसियों ने जांच के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें उस पर केवल अवैध रूप से सरहद पार करने का आरोप साबित हुआ। 13 मई को कोर्ट ने उसे एक साल की सजा सुनाई। इस दौरान बादल ने जेल में इस्लाम धर्म भी अपनाया और रोजे रखे।
अब एक साल की सजा पूरी होने के बाद बादल पाकिस्तान जेल से रिहा (Badal Pakistan Jail Release) हो चुका है। उसके परिवार ने गांव में मिठाई बांटकर खुशी जताई और उम्मीद की है कि जल्द ही उनका बेटा सुरक्षित भारत लौटेगा।





