सीजी भास्कर, 30 दिसंबर। कृषि विविधीकरण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी जिले ने एक और ठोस पहल की है। विकासखंड नगरी के ग्राम सांकरा से 40 इच्छुक महिला किसान समूह का एक दल रायपुर जिले के विकासखंड आरंग अंतर्गत ग्राम लिंगाडीह पहुंचा, जहां उन्होंने मखाना खेती (Makhana Farming) से जुड़ी आधुनिक उत्पादन एवं प्रोसेसिंग तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस अध्ययन भ्रमण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम की संपूर्ण व्यवस्था जिला उद्यानिकी विभाग, धमतरी द्वारा की गई।
विशेष रूप से कलेक्टर धमतरी द्वारा मखाना खेती को बढ़ावा देने, किसानों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और तकनीकी मार्गदर्शन देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य धान पर निर्भरता कम कर ग्रामीण क्षेत्रों में आय के वैकल्पिक और लाभकारी स्रोत विकसित करना है।
ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी
अब धमतरी जिले में धान से आगे सोच के साथ मखाना खेती (Makhana Farming) ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलने की दिशा में एक नई उम्मीद बनकर उभर रही है। छोटी-छोटी डबरियों से समृद्धि तक का यह सफर महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता की ठोस राह दिखा रहा है। शासकीय प्रयासों और प्रशासनिक सहयोग से यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में मखाना उत्पादन से धमतरी जिले में महिला सशक्तिकरण और आर्थिक मजबूती को नई गति मिलेगी।
मखाना उत्पादन, लागत और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी
कलेक्टर के सतत प्रयासों से धमतरी जिले के ग्राम राखी, पीपरछेड़ी, दंडेसरा, राँकाडोह एवं सांकरा में लगभग 90 एकड़ क्षेत्र में डबरी चिन्हांकन कर मखाना खेती (Makhana Farming) की शुरुआत हो चुकी है। प्रशिक्षण के दौरान महिला किसानों ने स्थानीय ओजस फार्म का भ्रमण करते हुए मखाना की खेती, कटाई, प्रसंस्करण और विपणन की संपूर्ण प्रक्रिया को नजदीक से समझा।
फार्म प्रबंधक संजय नामदेव ने बताया कि मखाना की खेती के लिए जलभराव वाली डबरी, तालाब अथवा अन्य जल संरचनाएं सर्वाधिक उपयुक्त होती हैं। उन्होंने बीज चयन, उत्पादन लागत, तकनीकी आवश्यकताओं और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि उचित प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग मिलने पर यह फसल किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।
स्थायी आय का मजबूत स्रोत
इस अवसर पर शिव साहू ने मखाना खेती के व्यावसायिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कम जोखिम वाली फसल है, जिससे ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आय का मजबूत स्रोत विकसित किया जा सकता है। महिला किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मखाना खेती (Makhana Farming) उन्हें आत्मनिर्भर बनने का नया अवसर प्रदान कर रही है।
एक किलो बीज से 200–250 ग्राम पॉप तैयार
बिहार के दरभंगा निवासी मखाना प्रोसेसिंग विशेषज्ञ रोहित साहनी फोड़ी ने प्रसंस्करण की बारीकियां समझाते हुए बताया कि एक किलो मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार कीमत 700 से 1000 रुपये प्रति किलो तक होती है। उन्होंने बताया कि यदि किसान स्वयं उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग भी करें, तो प्रति एकड़ लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
औसत उत्पादन 10 क्विंटल तक
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ लगभग 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और औसत उत्पादन 10 क्विंटल तक प्राप्त किया जा सकता है। छह माह की अवधि वाली इस फसल में कीट-व्याधियों का प्रकोप नगण्य होता है और चोरी जैसी समस्याएं भी नहीं होतीं, जिससे यह किसानों के लिए सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बनती है।
शासकीय योजनाओं की दी जानकारी
उप संचालक उद्यानिकी, धमतरी डॉ. पूजा कश्यप साहू के मार्गदर्शन में ग्रामीण उद्यानिकी अधिकारी चंद्रप्रकाश साहू एवं बीटीएम पीताम्बर भुआर्य के साथ आए किसानों को मखाना बोर्ड एवं राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी दी गई। डॉ. पूजा ने बताया कि मखाना खेती (Makhana Farming) को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और सब्सिडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यावसायिक मखाना उत्पादन आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह में प्रारंभ किया गया था, जहां राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित है। आज यह केंद्र प्रदेश में मखाना उत्पादन की पहचान बन चुका है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा
धमतरी जिले की महिला किसानों का यह प्रयास न केवल कृषि नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और प्रशासनिक संकल्प से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है। मखाना खेती (Makhana Farming) अब धमतरी की ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार बनती जा रही है।


