सीजी भास्कर, 4 जनवरी। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR Voter Notice Raipur) के तहत शनिवार से दावा-आपत्तियों की प्रक्रिया शुरू होते ही मतदाताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नियमानुसार 3 जनवरी 2026 से प्रदेश के करीब 14 लाख 26 हजार 212 और रायपुर जिले के 1 लाख 33 हजार 53 मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने हैं। शुरुआती दौर में कई जोन कार्यालयों में मतदाताओं द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों को मान्य नहीं बताकर लौटा दिया गया, जबकि दिशा-निर्देशों में स्पष्ट है कि 13 मान्य दस्तावेजों में से केवल एक दस्तावेज प्रस्तुत कर मतदाता अपना नाम सूची में दर्ज करवा सकता है। इसे लेकर (SIR Voter Notice) प्रक्रिया में असंतोष और भ्रम की स्थिति बन गई है।
प्रदेशभर में लगभग 2 हजार और रायपुर जिले में 116 अधिकारी दावा-आपत्ति की सुनवाई कर रहे हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मतदाताओं को अलग-अलग कारण बताकर वापस भेजा जा रहा है। कई मतदाता दस्तावेजों के सही होने के बावजूद लौटाए जाने से नाराज दिखे। अधिकारी निर्देशों का हवाला देते हुए कह रहे हैं कि केवल एक दस्तावेज पर्याप्त है। इस पूरे परिदृश्य ने (SIR Voter Notice) की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर दिया है।
दस्तावेजों पर विवाद
जोन क्रमांक-पांच में दावा-आपत्ति की सुनवाई के दौरान कई मतदाता अपने शैक्षणिक प्रमाण पत्र लेकर आए, लेकिन अधिकारियों ने इन्हें स्वीकार नहीं किया। कुछ मतदाताओं से 2003 की मतदाता सूची में नाम होने का प्रमाण भी मांगा गया। इससे मतदाताओं में भारी असंतोष देखा गया। सवाल उठता है कि यदि नियमों में 13 दस्तावेजों में से कोई एक पर्याप्त माना गया है, तो 2003 की सूची पर जोर क्यों दिया जा रहा है। इस विवाद ने (SIR Voter Notice) को और जटिल बना दिया है।
नोटिस और सुनवाई का आंकड़ा
निर्वाचन विभाग के अनुसार रायपुर जिले में अब तक करीब 5 हजार मतदाताओं को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए बुलाया गया। इनमें से केवल 1 हजार मतदाता ही कार्यालय पहुंचे, जबकि लगभग 800 मतदाताओं की दावा-आपत्ति पूरी हो सकी। कई आवेदनों को विभिन्न कारणों से लौटा दिया गया। इस स्थिति ने (SIR Voter Notice) की गंभीरता और जमीनी चुनौतियों को उजागर किया है।
मतदाताओं की मुश्किलें
मतदाताओं ने बताया कि कई बार आधार कार्ड और राशन कार्ड लेकर कार्यालय पहुंचे, लेकिन उन्हें दस्तावेज मान्य नहीं बताकर लौटाया गया। इससे मतदाताओं में भ्रम और नाराजगी बढ़ रही है। जोन कार्यालयों में बहस और हंगामा देखने को मिला, जिससे (SIR Voter Notice) के सही क्रियान्वयन पर दबाव और बढ़ गया।
प्रशासनिक चुनौती
अधिकारियों का कहना है कि दावा-आपत्ति की सुनवाई में प्रत्येक मामले को ध्यानपूर्वक देखा जा रहा है। हालांकि बड़े पैमाने पर मतदाता पहुंचने और दस्तावेजों में छोटी-छोटी खामियों के कारण कार्यालयों में भीड़ और विवाद बढ़ गया। इस प्रशासनिक चुनौती ने (SIR Voter Notice) के महत्व को और स्पष्ट कर दिया है।
निर्वाचन विभाग ने आश्वासन दिया है कि सभी मतदाताओं की सुनवाई क्रमबद्ध रूप से पूरी की जाएगी और विवादास्पद मामलों में मार्गदर्शन के लिए विशेष हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएंगे। मतदाता जागरूकता और सूचना के माध्यम से (SIR Voter Notice) के सही कार्यान्वयन की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।


