सीजी भास्कर, 08 जनवरी। इराक के उत्तरी शहर अर्बिल में अमेरिका की ओर से 101वीं एयरबोर्न डिवीजन की तैनाती ने सैन्य और राजनीतिक हलकों में हलचल (US Army Erbil Deployment) तेज कर दी है। यह यूनिट अमेरिकी सेना की सबसे ताकतवर और आक्रामक एयर असॉल्ट फोर्स मानी जाती है, जिसे आमतौर पर बड़े और निर्णायक अभियानों से पहले तैनात किया जाता है। हेलीकॉप्टर आधारित हमलों, तेज घुसपैठ और विशेष सैन्य ऑपरेशन में इसकी भूमिका अहम रही है।
पुराना इतिहास, नई आशंकाएं
101वीं एयरबोर्न डिवीजन इससे पहले भी इराक में सक्रिय रह चुकी है। 2003 में बगदाद पर हुए अमेरिकी हमले के बाद इस यूनिट को लंबे समय तक ऐन अल-असद एयरबेस में तैनात रखा गया था। बाद में बेस के बंद होने पर इसे उत्तरी इराक के अल-हरिर एयरबेस भेजा गया। अब अर्बिल में इसकी दोबारा मौजूदगी को लेकर यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका किसी नए और बड़े सैन्य कदम की तैयारी में है।
इराकी राजनीति में चिंता
इराकी राजनीतिक विश्लेषक अथिर अल-शर्रा का कहना है कि 101वीं एयरबोर्न जैसी यूनिट की तैनाती साधारण सैन्य सहयोग का संकेत (US Army Erbil Deployment) नहीं देती। उनके मुताबिक, यह कदम बगदाद सरकार और कुर्दिस्तान रीजनल गवर्नमेंट दोनों के लिए गंभीर चेतावनी है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर पारदर्शिता और आधिकारिक स्पष्टीकरण की जरूरत बताई है।
सीधे हमलावर अभियानों की यूनिट
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि 101वीं एयरबोर्न डिवीजन की भूमिका उन स्पेशल यूनिट्स से मिलती-जुलती है, जो सीधे आक्रामक अभियानों में इस्तेमाल की जाती हैं। 2003 में बगदाद पर हमले के दौरान इस यूनिट ने अहम भूमिका निभाई थी और इसके बाद कई हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी और ऑपरेशन इसी के जरिए किए गए।
गोपनीय बैठकों ने बढ़ाई अटकलें
हाल के महीनों में 101वीं एयरबोर्न के वरिष्ठ अधिकारियों और कुर्दिस्तान क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं के बीच कई अहम बैठकें हुई हैं। इन बैठकों को सामान्य सैन्य समन्वय से अलग माना जा रहा है, क्योंकि यह यूनिट रोजमर्रा की सुरक्षा गतिविधियों के बजाय विशेष हेलीकॉप्टर आधारित अभियानों के लिए जानी जाती है।
क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा
एक अन्य इराकी विश्लेषक इब्राहीम अल-सर्राज ने चेतावनी दी है कि अमेरिका उन समूहों या व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है, जो उसकी नीतियों का विरोध (US Army Erbil Deployment) करते हैं। उनका कहना है कि बीते वर्षों में अन्य देशों में हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों से यह संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों को नजरअंदाज किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अर्बिल में 101वीं एयरबोर्न की तैनाती केवल इराक ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए एक संवेदनशील और निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।





