सीजी भास्कर, 13 जनवरी। दिल्ली के वसंत कुंज इलाके से तीन बुजुर्गों के रहस्यमय ढंग से लापता होने के मामले ने अब गंभीर संवैधानिक मोड़ (High Court Missing Case) ले लिया है। करीब एक महीने से कोई सुराग न मिलने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस को बिना किसी देरी के प्रभावी कार्रवाई करने और बुजुर्गों का पता लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की डिवीजन बेंच ने इस मामले को “अत्यंत गंभीर” बताते हुए दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए।
परिजनों की गुहार पर हाई कोर्ट का दखल
यह मामला ओइंद्रिला दासगुप्ता द्वारा दायर याचिका के बाद हाई कोर्ट पहुंचा। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उनके माता-पिता और चाचा पिछले एक महीने से लापता हैं, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की निष्क्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब मामला बुजुर्ग नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा हो।
कौन-कौन हैं लापता?
मिहिर कुमार दासगुप्ता
अनिंदिता दासगुप्ता
समीर दासगुप्ता
तीनों 13 दिसंबर को वसंत कुंज के पॉकेट-ए स्थित घर से लापता हुए थे।
घर लौटीं तो अंदर का नजारा देख सन्न रह गईं
याचिका में बताया गया कि 13 दिसंबर को दोपहर करीब ढाई बजे तीनों बुजुर्ग अपने पालतू कुत्ते के साथ अचानक (High Court Missing Case) लापता हो गए। जब ओइंद्रिला घर लौटीं और फोन किया, तो किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया।
घर के भीतर का नजारा और भी चिंताजनक था—सामान बिखरा हुआ था, जिससे पहले चोरी और फिर अपहरण की आशंका गहराई। इसके बाद तुरंत किशनगढ़ थाने में शिकायत दी गई।
पूर्व पति की धमकी ने बढ़ाई आशंका
मामले को और गंभीर बनाते हुए ओइंद्रिला ने कोर्ट को बताया कि उन्हें अपने पूर्व पति की ओर से फोन पर धमकी मिली थी। आरोप है कि कॉल में यह दावा किया गया कि बुजुर्गों का अपहरण उसी के इशारे पर हुआ है।
इसके बाद 14 और 15 दिसंबर को अतिरिक्त शिकायतें दी गईं, जिनमें व्हाट्सऐप के जरिए मिली धमकियों और कुछ परिजनों के संदिग्ध रोल का भी जिक्र किया गया।
FIR क्यों नहीं हुई?
याचिकाकर्ता का आरोप है कि 16 से 18 दिसंबर के बीच कई बार थाने जाने के बावजूद न तो FIR दर्ज की गई और न ही कोई ठोस जांच शुरू हुई।
पुलिस की निष्क्रियता पर कोर्ट सख्त
लगातार कार्रवाई न होने से आहत होकर ओइंद्रिला दासगुप्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत हाई कोर्ट का रुख किया। साथ ही पटियाला हाउस कोर्ट में भी FIR दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने पहले ही दिल्ली पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी और अब साफ निर्देश (High Court Missing Case) दिए हैं कि बुजुर्गों की तलाश में कोई ढिलाई न बरती जाए।
13 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को तय की है। कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल पूरा मामला न्यायिक निगरानी में है और दिल्ली पुलिस से त्वरित, ठोस और पारदर्शी कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।





