सीजी भास्कर, 14 जनवरी। राज्य के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। रबी मौसम में उगाई जाने वाली उद्यानिकी फसलों के लिए बीमा पंजीयन की अंतिम तिथि (Horticulture Crop Insurance) बढ़ा दी गई है। राज्य सरकार ने पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत अब किसानों को 15 जनवरी तक बीमा पंजीयन कराने की सुविधा दी है।यह निर्णय खास तौर पर उन किसानों के हित में लिया गया है, जो अब तक किसी कारणवश अपनी फसलों का बीमा नहीं करा पाए थे।
मौसम की मार से आर्थिक सुरक्षा का कवच
उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य किसानों को वर्षा, तापमान और अन्य मौसमीय उतार-चढ़ाव से होने वाली अचानक फसल क्षति के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना है।
बीमा योजना के तहत अधिक वर्षा, कम वर्षा, बेमौसम बारिश, अत्यधिक या न्यून तापमान, बीमारी के अनुकूल मौसम, तेज वायुगति, ओलावृष्टि और चक्रवाती हवाओं को प्रमुख जोखिमों के रूप में शामिल (Horticulture Crop Insurance) किया गया है।
इन 6 उद्यानिकी फसलों को किया गया है अधिसूचित
जनवरी माह में रबी मौसम के अंतर्गत 6 अधिसूचित उद्यानिकी फसलें शामिल की गई हैं—
टमाटर
बैंगन
फूलगोभी
पत्तागोभी
प्याज
आलू
राज्य में इन फसलों के बीमा का दायित्व एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी (AIC) को सौंपा गया है।
मौसम आंकड़ों के आधार पर होगा बीमा दावा
बीमा दावा राशि का निर्धारण स्वचालित मौसम केंद्रों से प्राप्त वास्तविक मौसमीय आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। इन आंकड़ों की तुलना बीमा टर्मशीट में तय मानक ट्रिगर से की जाती है, जिसके बाद क्षतिपूर्ति राशि तय होती है। इससे दावे की प्रक्रिया पारदर्शी और तेज बनती है।
उद्यानिकी फसलों के बीमा पंजीयन के लिए किसानों को—
बीमा के लिए जरूरी दस्तावेज
आधार नंबर
भू-अभिलेख से जुड़े दस्तावेज
फसल बुआई प्रमाण पत्र
फसल बोने के आशय का स्वघोषणा पत्र
जैसे दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। अधिक जानकारी के लिए किसान अपने नजदीकी उद्यानिकी कार्यालय से संपर्क (Horticulture Crop Insurance) कर सकते हैं या बीमा कंपनी के टोल-फ्री नंबर 1800-209-5959 पर कॉल कर सकते हैं।
अब तक लाखों किसानों को मिल चुका है लाभ
उल्लेखनीय है कि राज्य में यह योजना रबी मौसम 2016 से 2024-25 तक लागू रही है, जिसके दौरान 1,75,211 किसानों ने 1,28,666 हेक्टेयर में रोपित उद्यानिकी फसलों का बीमा कराया। इनमें से 1,28,103 किसानों को करीब 1247.26 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान किया गया। वर्ष 2025-26 में अब तक 5003 हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों का बीमा कराया जा चुका है।


