सीजी भास्कर, 15 जनवरी। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी (Bijapur Maoist Surrender) मिली है। जिले में सक्रिय 52 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इन सभी नक्सलियों ने बीजापुर पुलिस अधीक्षक और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष हथियार डाल दिए। आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादियों पर कुल मिलाकर लगभग 1 करोड़ 45 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में नक्सली संगठन के बड़े कैडर से जुड़े सदस्य भी शामिल हैं, जो लंबे समय से नक्सल गतिविधियों में सक्रिय थे। इन सभी ने सरकार की पुना मार्गेम (पुनर्वास) योजना के तहत हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई है।
बीजापुर एसपी जितेंद्र यादव ने बताया कि यह सफलता सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षाबलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे एंटी नक्सल अभियानों और विकासपरक योजनाओं (Bijapur Maoist Surrender) का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के दबाव, क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा और शासन की पुनर्वास नीतियों ने नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया है।
एसपी ने यह भी बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत सभी सुविधाएं और सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट (Bijapur Maoist Surrender) सकें। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के सामूहिक आत्मसमर्पण से जिले में नक्सल गतिविधियों पर निर्णायक असर पड़ेगा और क्षेत्र में शांति व विकास की प्रक्रिया को और गति मिलेगी।
नक्सल मोर्चे पर मिली इस सफलता को सुरक्षा एजेंसियां एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रही हैं, जो आने वाले समय में और नक्सलियों को हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित कर सकती है।


