सीजी भास्कर, 17 जनवरी। राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों और डिजिटल ठगी की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव विकासशील ने (Digital Fraud Prevention) पर विशेष फोकस करने के सख्त निर्देश दिए हैं। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की 100वीं तिमाही बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि डिजिटल लेन-देन के बढ़ते दायरे के साथ साइबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि आम नागरिकों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके और (Digital Fraud Prevention) के प्रयास जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू हों।
बैठक में बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने शासन की विभिन्न जनहितकारी योजनाओं के अंतर्गत लंबित बैंक प्रकरणों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश बैंकर्स को दिए। राज्य स्तरीय लीड बैंक तथा अन्य बैंकों में लंबित ऋण प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि पात्र हितग्राहियों को समय पर ऋण उपलब्ध कराना आर्थिक गतिविधियों को गति देगा और स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य के सभी शहरी, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं की समान पहुंच सुनिश्चित की जाए। बैठक में यह जानकारी दी गई कि राज्य का क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात अब राष्ट्रीय औसत के समकक्ष पहुंच चुका है, जो राज्य की मजबूत बैंकिंग प्रगति का संकेत है। इसके बावजूद उन्होंने बैंकर्स को निर्देशित किया कि डिजिटल लेन-देन को सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि लोग (Digital Fraud Prevention) के प्रति सजग और सतर्क बन सकें।
उद्गम पोर्टल पर चर्चा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न बैंकों में वर्षों से निष्क्रिय पड़े खातों में बड़ी राशि जमा है, जिन पर खाताधारकों या उनके परिजनों द्वारा दावा नहीं किया गया है। ऐसे खातों की पहचान कर लोगों को उनकी जमा राशि वापस दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाई जाए। उन्होंने कहा कि उद्गम पोर्टल के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि खाताधारक की राशि कहां जमा है और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर बैंक से राशि प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार जरूरी है, जिससे (Digital Fraud Prevention) के साथ-साथ वित्तीय पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो सके।
बैठक में डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के मामलों में लगातार हो रही वृद्धि पर चिंता व्यक्त की गई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में भी विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि आमजन साइबर अपराधों से सावधान रहें और (Digital Fraud Prevention) के उपायों को समझ सकें। आधार से बैंक खातों को लिंक करने की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि सभी खातों को आधार से जोड़ा जाए, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से हितग्राहियों तक पहुंचे।
मुख्य सचिव ने ऋण वितरण प्रक्रिया में सुधार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र सहित अन्य ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जाए और जनहितकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। बैठक में बताया गया कि वित्तीय समावेशन संतृप्ति अभियान के तहत राज्य में अब तक 11,680 शिविरों का आयोजन किया जा चुका है, जिनके माध्यम से ग्रामीणों, महिला स्वयं सहायता समूहों और कमजोर वर्गों को बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी दी गई।
बैठक में जन-धन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, पीएम स्वनिधि योजना और मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण अनुदान योजना सहित अन्य योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। राज्य लीड बैंक अधिकारी ने विभिन्न क्षेत्रों में बैंकिंग प्रकरणों की स्थिति से अवगत कराया। बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, नाबार्ड सहित विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि, राज्य शासन के अधिकारी और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के सदस्य उपस्थित रहे।


