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Home » Samagra Shiksha Budget Plan  : CS का चाबुक! ‘सिर्फ स्कूल की दीवारें खड़ी करने से काम नहीं चलेगा, बच्चों का भविष्य सुधारो’, कड़े तेवरों से हिला शिक्षा विभाग

Samagra Shiksha Budget Plan  : CS का चाबुक! ‘सिर्फ स्कूल की दीवारें खड़ी करने से काम नहीं चलेगा, बच्चों का भविष्य सुधारो’, कड़े तेवरों से हिला शिक्षा विभाग

By Newsdesk Admin
28/05/2026
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Samagra Shiksha Budget Plan 
Samagra Shiksha Budget Plan 

सीजी भास्कर, 28 मई : छत्तीसगढ़ के स्कूली शिक्षा (Samagra Shiksha Budget Plan) ढांचे में आमूलचूल बदलाव लाने और करोड़ों रुपये के बजट को सही ठिकाने पर लगाने के लिए शासन के सबसे बड़े स्तर पर एक बहुत बड़ा प्रशासनिक धमाका हुआ है। नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल और बेहद संवेदनशील बैठक में जो कुछ भी हुआ, उसने शिक्षा विभाग के आला अफसरों की नींद उड़ा दी है। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ समग्र शिक्षा कार्यकारिणी समिति की यह महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई।

Contents
  • मुझे बच्चों का रिजल्ट चाहिए’
  • बनेगा स्पेशल ट्रैकिंग सिस्टम
  • गणित-विज्ञान के लिए बनेगा ‘मास्टर पूल’
  • वोकेशनल कोर्स का नया रोडमैप

बैठक की शुरुआत तो सामान्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के साथ हुई थी, लेकिन जैसे ही बजट और निर्माण कार्यों की फाइलें सामने आईं, मुख्य सचिव के तेवर पूरी तरह आक्रामक हो गए। उन्होंने दोटूक शब्दों में साफ कर दिया कि अब कागजी आंकड़ों और कछुआ गति से काम करने का पुराना ढर्रा छत्तीसगढ़ में बिल्कुल नहीं चलेगा, क्योंकि सरकार अब सीधे तौर पर कदम (Samagra Shiksha Budget Plan) की दिशा में पूरी गंभीरता से बढ़ाने जा रही है।

दरअसल, यह बैठक आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करोड़ों रुपये की वार्षिक कार्ययोजना और बजट प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी देने के लिए बुलाई गई थी। बैठक में जिस तरह से पुराने अटके हुए निर्माण कार्यों, स्कूलों के युक्तियुक्तकरण (Rationalization) और मनमर्जी से किए गए स्थल परिवर्तन के प्रस्ताव सामने आए, उस पर मुख्य सचिव ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि बजट का एक-एक रुपया सीधे तौर पर बच्चों की पढ़ाई और उनकी सहूलियत पर खर्च होना चाहिए, न कि अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत की भेंट चढ़ना चाहिए। इस कड़े रुख के बाद पूरे शिक्षा विभाग के भीतर हड़कंप मच गया है, क्योंकि अब हर एक अधिकारी की सीधी जवाबदेही तय होने जा रही है, जिससे कि नुकसान (Samagra Shiksha Budget Plan) के मूल उद्देश्यों को न पहुंचे।

मुझे बच्चों का रिजल्ट चाहिए’

समीक्षा के दौरान सबसे तीखा और सस्पेंस से भरा मोड़ तब आया जब मुख्य सचिव ने स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत होने वाले विविध निर्माण कार्यों की फाइलों को देखा। उन्होंने अधिकारियों को आईना दिखाते हुए कड़े शब्दों में कहा कि बजट प्लान में केवल नए-नए भवन निर्माण के ठेके बांटना बंद करें। उन्होंने निर्देश दिए कि अब से पीडब्ल्यूडी या अन्य एजेंसियों के बजाय स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत होने वाले विविध निर्माण कार्यों को सीधे ‘शाला प्रबंधन समिति’ (SMC) के माध्यम से कराया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि मुझे सिर्फ ईंट-गारे की दीवारें नहीं खड़ी देखनी हैं, बल्कि हर हाल में बच्चों का लर्निंग आउटकम सुधरना चाहिए। इस अभूतपूर्व निर्णय को शिक्षा के स्तर में सुधार लाने और बदलाव (Samagra Shiksha Budget Plan) को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक चाबुक माना जा रहा है।

मुख्य सचिव ने साफ किया कि हर एक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना इस सरकार का सर्वोच्च संकल्प है। इसके लिए उन्होंने स्कूलों में संसाधन, शिक्षक और आधुनिक तकनीक, इन तीनों मोर्चों को एक साथ मजबूत करने का कड़ा आदेश दिया। उन्होंने बजट में केवल पारंपरिक चीजों को शामिल करने के बजाय शिक्षा की गुणवत्ता, पहुंच और समावेशी विकास पर विशेष जोर देने को कहा। अफसरों को स्पष्ट अल्टीमेटम दिया गया है कि अगर बजट में लर्निंग आउटकम और नवाचारों (Innovations) को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो ऐसे किसी भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया जाएगा। अब देखना यह है कि अफसर इस कड़े निर्देश के बाद अपनी पुरानी कार्यप्रणाली में कितना सुधार ला पाते हैं, जो कि नियम (Samagra Shiksha Budget Plan) के तहत अनुशासन का एक नया पैमाना है।

बनेगा स्पेशल ट्रैकिंग सिस्टम

बैठक में राज्य के सरकारी स्कूलों में छात्रों के बीच में ही पढ़ाई छोड़ देने यानी ‘ड्रॉपआउट’ की भयावह स्थिति पर भी गहरा सस्पेंस और चिंता व्यक्त की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से सीधे सवाल किया कि हर साल करोड़ों का बजट फूंकने के बाद भी बच्चे स्कूल क्यों छोड़ रहे हैं? उन्होंने कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा कि माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर छात्रों के ड्रॉपआउट की स्थिति पर चौबीसों घंटे विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने इसके लिए एक बड़ा लक्ष्य तय करते हुए कहा कि कक्षा 1वीं, 8वीं और 10वीं में ड्रॉपआउट दर को हर हाल में ‘शून्य’ (Zero) पर लाना होगा। इसके लिए देश का सबसे आधुनिक और विशेष ट्रैकिंग सिस्टम बनाने का फरमान जारी किया गया है, ताकि एक-एक बच्चे की डिजिटल निगरानी हो सके और गति (Samagra Shiksha Budget Plan) को गति देने के लिए इसे अनिवार्य किया गया है।

’मुख्य सचिव ने समग्र शिक्षा अभियान 2026 के बजट प्लान की बैठक ली- दिया गुणवत्ता और नवाचार पर विशेष जोर’

जो बच्चे किन्हीं कारणों से स्कूल छोड़ चुके हैं, उन्हें वापस स्कूल की चौखट तक लाने के लिए सरकार अब एक बड़ा अभियान छेड़ने जा रही है। मुख्य सचिव ने कहा कि ऐसे शाला त्यागी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए विशेष ‘ब्रिज कोर्स’ (Bridge Course) चलाए जाएं। इसके साथ ही, सरकारी स्कूलों के प्रति बच्चों का आकर्षण बढ़ाने के लिए राज्य के सभी माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में युद्ध स्तर पर स्मार्ट क्लासरूम और आईसीटी (ICT) लैब स्थापित की जाएंगी। अब राज्य के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के स्कूलों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट की व्यवस्था की जाएगी ताकि कोई भी गरीब बच्चा तकनीक की रेस में पीछे न छूटे, जो शामिल (Samagra Shiksha Budget Plan) के एजेंडे में सबसे ऊपर शामिल था।

गणित-विज्ञान के लिए बनेगा ‘मास्टर पूल’

प्रशासनिक कसावट लाने के साथ-साथ मुख्य सचिव ने शिक्षकों की कार्यशैली और उनकी ट्रेनिंग को लेकर भी कई बड़े और चौंकाने वाले फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के कड़े प्रावधानों के अनुरूप प्रदेश के सभी शिक्षकों को फेज-वाइज (चरणबद्ध) तरीके से अनिवार्य रूप से आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाए। अक्सर यह शिकायत आती है कि सरकारी स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे कठिन विषयों के शिक्षकों की भारी कमी है या उनकी गुणवत्ता ठीक नहीं है। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए मुख्य सचिव ने इन तीनों मुख्य विषयों के लिए राज्य स्तर पर एक विशेष ‘मास्टर ट्रेनर पूल’ तैयार करने का आदेश दिया है, जो सीधे तौर पर प्रयास (Samagra Shiksha Budget Plan) को समय-सीमा के भीतर अमलीजामा पहनाना चाहती है।

इसके साथ ही, मुख्य सचिव ने बुनियादी सुविधाओं के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सीधे टारगेट बेस्ड काम करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की नितांत आवश्यकता है, वहां अतिरिक्त कक्षा-कक्ष (Classrooms), बालिकाओं के लिए सर्वसुविधायुक्त शौचालय, शुद्ध पेयजल, बिजली और सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवॉल के काम सबसे पहली प्राथमिकता में रखे जाएं। यदि इन मूलभूत कामों में किसी भी तरह की लेटलतीफी या लापरवाही पाई गई, तो इसके लिए सीधे तौर पर जिले के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और जिला समन्वयक जिम्मेदार होंगे। सरकार का यह सख्त रुख साफ करता है कि अब ढर्रे पर काम करने का समय खत्म हो चुका है, ताकि बचत (Samagra Shiksha Budget Plan) के तहत सरकारी पैसे की पाई-पाई बचाई जा सके।

वोकेशनल कोर्स का नया रोडमैप

मुख्य सचिव ने समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग यानी दिव्यांग बच्चों को भी शिक्षा की मुख्यधारा में सम्मानजनक स्थान देने के लिए बजट में विशेष प्रावधान करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि समावेशी शिक्षा के तहत दिव्यांग बच्चों के लिए हर ब्लॉक में विशेष संसाधन कक्ष (Resource Rooms), आधुनिक थेरेपी यूनिट और उनके अनुकूल विशेष टीएलएम (Teaching Learning Material) का प्रावधान बजट में अनिवार्य रूप से रखा जाए। इसके अलावा, कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए वोकेशनल एजुकेशन (व्यावसायिक शिक्षा) को पूरी तरह से री-डिजाइन किया जाएगा। अब स्कूलों में केवल पारंपरिक पढ़ाई नहीं होगी, बल्कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार कृषि, आईटी (IT), हेल्थकेयर और टूरिज्म जैसे रोजगारोन्मुखी ट्रेड्स में विशेष कोर्स चलाए जाएंगे।

अब सबसे बड़ा सस्पेंस और चुनौती यह है कि क्या मुख्य सचिव विकासशील के इन बेहद कड़े तेवरों और आक्रामक निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग का अमला धरातल पर बदलाव ला पाएगा? क्या इस बार का बजट वाकई छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों की बदहाली को दूर कर पाएगा या फिर पुरानी फाइलों की तरह यह नया प्लान भी लालफीताशाही का शिकार हो जाएगा? बहरहाल, मुख्य सचिव की इस मैराथन बैठक ने यह तो साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ में अब शिक्षा व्यवस्था केवल कागजों में नहीं चमकेगी। आने वाले दिनों में देखना दिलचस्प होगा कि मंत्रालय से निकला यह हंटर छत्तीसगढ़ के सुदूर बस्तर और सरगुजा के स्कूलों तक कितनी खुशहाली और बदलाव (Samagra Shiksha Budget Plan) की यह नई लहर छत्तीसगढ़ के बच्चों के भविष्य की तस्वीर और तकदीर बदल पाएगी।

 

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