सीजी भास्कर, 20 फरवरी। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ते हुए राज्य सरकार ने अभियान को नई गति देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट कहा कि पानी का संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि जल संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और उपलब्ध जल स्रोतों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास करें।
नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में “जल संचय-जन भागीदारी 2.0” अभियान की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता मुख्यमंत्री साय और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने की। केंद्रीय मंत्री वर्चुअल माध्यम से जुड़े और राज्य में चल रहे कार्यों की सराहना की। बिलासपुर, दुर्ग और सूरजपुर जिलों के कलेक्टरों ने अभियान के तहत निर्माणाधीन और पूर्ण परियोजनाओं का ब्यौरा प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में जल संकट पर्यावरणीय मुद्दा भर नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक और सामाजिक विकास से भी सीधा जुड़ा है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में छत्तीसगढ़ ने देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया था और सामुदायिक मॉडल के जरिए बोरवेल रिचार्ज, रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, सोक पिट और ओपनवेल रिचार्ज जैसी संरचनाओं का व्यापक निर्माण किया गया। वर्तमान में राज्य में 5 क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल भू-जल ब्लॉक चिन्हित हैं, जिनमें सुधार के सकारात्मक संकेत मिले हैं।
दूसरे चरण में तकनीक आधारित रणनीति अपनाते हुए 31 मई 2026 तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने इसे जल सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों को खेतों में डबरी निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे भू-जल स्तर बढ़ेगा और किसानों को सिंचाई के साथ मत्स्य पालन जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी मिलेंगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस चरण में सभी संरचनाओं की जियोटैगिंग, ग्राम पंचायत स्तर पर वॉटर बजट तैयार करना और जल सुरक्षा योजनाओं का क्रियान्वयन प्राथमिकता में है। युवाओं को “जल मित्र” के रूप में प्रशिक्षित कर अभियान को जनआंदोलन बनाने की तैयारी की जा रही है। क्रिटिकल ब्लॉकों में 65 प्रतिशत और सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों में 40 प्रतिशत जल संरक्षण कार्यों का लक्ष्य तय किया गया है।
केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण के क्षेत्र में उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने मनरेगा के तहत उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने और ग्रामीण स्तर पर जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और सभी जिलों के कलेक्टर वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।
राज्य सरकार का मानना है कि यह अभियान आने वाले वर्षों में जल संकट से निपटने की मजबूत नींव तैयार करेगा और छत्तीसगढ़ को जल प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करेगा।






