सीजी भास्कर 23 फ़रवरी AI इकोसिस्टम में हलचल तब तेज हो गई जब Google ने कुछ Gemini Pro यूजर्स की पहुंच सीमित कर दी। आरोप है कि ये यूजर्स थर्ड-पार्टी टूल के ज़रिए प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल कर रहे थे। इस कदम के बाद (Google Gemini user ban) को लेकर डेवलपर्स में यह चिंता गहराने लगी कि क्या बड़ी टेक कंपनियां यूजर एक्सेस पर एकतरफा फैसला ले सकती हैं।
Google Gemini user ban और OpenClaw कनेक्शन, किन यूजर्स पर पड़ी मार
रिपोर्ट्स के मुताबिक, OpenClaw के जरिए कुछ यूजर्स एक AI-आधारित “एंटीग्रेविटी” टूल इस्तेमाल कर रहे थे, जो बिना गहरी कोडिंग जानकारी के सॉफ्टवेयर बनाने में मदद करता है। इसी बैकएंड के कथित दुरुपयोग को वजह बताते हुए कार्रवाई की गई। इससे (Google Gemini user ban) की टाइमिंग और दायरे पर सवाल उठने लगे—क्योंकि असर सीधे कामकाजी डेवलपर्स पर पड़ा।
OpenClaw के फाउंडर पीटर स्टीनबर्गर ने सोशल प्लेटफॉर्म X पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह की अचानक पाबंदियां डेवलपर इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने संकेत दिया कि OpenClaw में एंटीग्रेविटी सपोर्ट पर दोबारा विचार किया जा सकता है। स्टीनबर्गर का तर्क है कि (Google Gemini user ban) जैसी कार्रवाइयों में पारदर्शी संवाद होना चाहिए, ताकि वैध यूजर्स बेवजह प्रभावित न हों।
Google Gemini user ban पर Google की सफाई, सुरक्षा बनाम सुविधा की दलील
कंपनी की ओर से कहा गया कि एंटीग्रेविटी बैकएंड के “malicious usage” में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई थी, जिससे सर्विस क्वालिटी और सिक्योरिटी दोनों पर असर पड़ रहा था। इसी वजह से संदिग्ध अकाउंट्स पर तुरंत रोक लगानी पड़ी। Google का दावा है कि (Google Gemini user ban) का मकसद प्लेटफॉर्म को सुरक्षित रखना है, न कि ईमानदार यूजर्स को परेशान करना।
इस विवाद ने AI प्लेटफॉर्म्स में अधिकारों की रेखा पर नई चर्चा छेड़ दी है—एक तरफ कंपनियों की सुरक्षा ज़िम्मेदारी, दूसरी तरफ यूजर्स की क्रिएटिव आज़ादी। कई डेवलपर्स का मानना है कि ऐसे मामलों में ग्रेस पीरियड और क्लियर गाइडलाइंस ज़रूरी हैं। आने वाले दिनों में (Google Gemini user ban) जैसे फैसलों से AI टूल्स की पॉलिसी और पारदर्शिता पर दबाव बढ़ सकता है।






