बलौदाबाजार जिले के पलारी थाना क्षेत्र अंतर्गत छेरकाडीह जारा गांव में एक कथित अवैध क्लिनिक में इलाज के दौरान चार माह की गर्भवती महिला की मौत का मामला सामने आया है। इस Illegal Clinic Case ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और झोलाछाप चिकित्सकों पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इंजेक्शन के बाद बिगड़ी तबीयत
परिजनों के अनुसार महिला को सर्दी-खांसी की शिकायत थी, जिसके चलते वह गांव में संचालित एक निजी क्लिनिक पहुंची थी। आरोप है कि इलाज के दौरान इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी हालत अचानक बिगड़ गई। उसे उल्टियां होने लगीं और कुछ ही देर में वह बेहोश हो गई। गंभीर स्थिति में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पलारी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह घटना अब (Pregnant Woman Death) के रूप में चर्चा में है।
बिना डिग्री के 17 साल से कर रहा था इलाज
जांच में सामने आया कि क्लिनिक संचालक के पास कोई मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री नहीं थी। पुलिस के अनुसार वह पिछले करीब 17 वर्षों से ग्रामीण क्षेत्र में इलाज कर रहा था। इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जो अब (Fake Doctor Arrested) के तहत कार्रवाई का सामना कर रहा है।
छापेमारी में गांजा और अवैध दवाइयां बरामद
राजस्व, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने क्लिनिक में छापा मारा। कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाइयां और गांजा बरामद किया गया। बरामद सामग्री के आधार पर आरोपी के खिलाफ (NDPS Act Case) सहित अन्य धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है।
पोस्टमॉर्टम नहीं, सीधे अंतिम संस्कार
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक शव दोपहर में लाया गया था। परिजन कुछ घंटों तक अस्पताल में रहे, लेकिन पोस्टमॉर्टम नहीं कराने का लिखित आवेदन देकर शव को घर ले गए। बिना पुलिस शिकायत के अंतिम संस्कार किए जाने की बात भी सामने आई है, जिससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
न्यायिक हिरासत में भेजा गया आरोपी
पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है, जिसमें दवाइयों की वैधता, मौत का सटीक कारण और क्लिनिक के संचालन की पूरी पृष्ठभूमि खंगाली जा रही है।





