बस्तर में दशकों से सक्रिय नक्सलवाद अब अपने निर्णायक मोड़ पर नजर आ रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के मुताबिक 31 मार्च 2026 एक ऐसी तारीख बनती दिख रही है, जब (Bastar Naxal Endgame) की दिशा साफ हो सकती है। लगातार कमजोर पड़ते नेटवर्क और बढ़ते दबाव ने हालात को पूरी तरह बदल दिया है।
पापाराव के सरेंडर से टूटी कमर
नक्सली संगठन को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब शीर्ष कमांडर पापाराव ने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद संगठन की रणनीतिक पकड़ कमजोर पड़ती चली गई। सूत्रों के अनुसार मिशिर बेसरा भी संपर्क में हैं और जल्द बड़ा फैसला ले सकते हैं, जिससे (Naxal Surrender Wave) और तेज होने के संकेत हैं।
दो साल में 5000 नेटवर्क खत्म
पिछले दो वर्षों के आंकड़े इस बदलाव की कहानी खुद बयां करते हैं। करीब 5000 नक्सलियों का नेटवर्क खत्म हुआ, जिसमें 3000 ने आत्मसमर्पण किया, 2000 गिरफ्तार किए गए और 500 मारे गए। यह आंकड़े दिखाते हैं कि (Anti Naxal Operations) किस तरह प्रभावी साबित हो रहे हैं।
पुनर्वास और विकास का असर
सिर्फ सैन्य कार्रवाई ही नहीं, बल्कि पुनर्वास नीति और विकास कार्यों ने भी इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है। गांवों तक सड़क, शिक्षा और रोजगार पहुंचने से स्थानीय स्तर पर नक्सलियों का प्रभाव कम हुआ है। इसी वजह से (Rehabilitation Policy Impact) अब साफ दिखाई दे रहा है।
जवानों की कुर्बानी और IED चुनौती
इस लंबे संघर्ष में 1416 जवानों ने अपनी जान गंवाई है, जो इस लड़ाई की गंभीरता को दर्शाता है। वहीं 1277 आईईडी ब्लास्ट के मामलों में नुकसान हुआ, लेकिन सुरक्षा बलों ने 4580 आईईडी बरामद कर कई बड़ी साजिशों को नाकाम किया। इससे (IED Threat Control) में भी बड़ी सफलता मिली है।
अब शांति और विकास की ओर बढ़ते कदम
मौजूदा हालात में बचे नक्सलियों के सामने आत्मसमर्पण या खत्म होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। बस्तर अब धीरे-धीरे हिंसा से बाहर निकलकर विकास और शांति की नई राह पर बढ़ता नजर आ रहा है। आने वाले समय में इस क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।


