सीजी भास्कर, 30 मार्च। देश में GST 2.0 लागू होने के बाद एक तरफ जहां आम लोगों और कारोबारियों को राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ इसका असर सभी राज्यों पर एक जैसा (Chhattisgarh GST Loss 1500 Crore ) नहीं पड़ रहा। खासकर छत्तीसगढ़ जैसे उत्पादन आधारित राज्यों के लिए यह व्यवस्था आर्थिक दबाव बढ़ाने वाली साबित हो रही है। अनुमान है कि इस वित्तीय वर्ष में राज्य को करीब 1500 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है।
देश में बढ़ा GST कलेक्शन (Chhattisgarh GST Loss 1500 Crore)
GST 2.0 के बाद टैक्स सिस्टम को सरल बनाया गया और कई दरों में कमी की गई, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिला। इसका असर राजस्व पर भी दिखा—दिसंबर 2025 में देश का GST कलेक्शन 1.75 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल से 6.1% ज्यादा है। वहीं जनवरी 2026 में यह बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।
लेकिन छत्तीसगढ़ में क्यों घट रहा राजस्व
हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर कलेक्शन बढ़ रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ में स्थिति उलट है। यहां GST राजस्व में करीब 10% तक गिरावट की आशंका जताई जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह राज्य की आर्थिक संरचना है—यहां उत्पादन ज्यादा है, लेकिन उपभोग अपेक्षाकृत कम।
गंतव्य आधारित टैक्स बना कारण
GST एक गंतव्य आधारित कर प्रणाली है, यानी टैक्स उसी राज्य को मिलता (Chhattisgarh GST Loss 1500 Crore) है जहां वस्तु का उपयोग होता है। छत्तीसगढ़ से स्टील, आयरन और कोयले जैसे उत्पाद बड़ी मात्रा में बाहर जाते हैं, जिससे टैक्स का बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों को मिल जाता है।
कोयला सेक्टर से बढ़ी परेशानी
राज्य के राजस्व पर सबसे ज्यादा असर कोयला सेक्टर से पड़ रहा है। पहले कोयले पर 5% GST था, जबकि इनपुट पर 18% टैक्स लगता था, जिससे कंपनियों के पास भारी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) जमा हो गया। अब दर 18% होने के बावजूद कंपनियां पुराने ITC का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे सरकार को नकद राजस्व कम मिल रहा है।
अन्य राज्यों में भी दिख रहा असर
यह समस्या सिर्फ छत्तीसगढ़ तक सीमित (Chhattisgarh GST Loss 1500 Crore) नहीं है। ओडिशा और झारखंड जैसे अन्य उत्पादन प्रधान राज्यों में भी करीब 1000 करोड़ रुपये तक के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
विकास योजनाओं पर पड़ सकता है असर
राजस्व में कमी का सीधा असर राज्य की योजनाओं और विकास कार्यों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति में सुधार आने में समय लगेगा और 2027-28 तक यह संतुलन बन सकता है।
समाधान की दिशा में क्या जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या के समाधान के लिए IGST सेटलमेंट सिस्टम की समीक्षा, उत्पादन राज्यों के लिए संतुलन तंत्र और क्षतिपूर्ति व्यवस्था पर विचार करना जरूरी है, ताकि सभी राज्यों को समान लाभ मिल सके।


