सीजी भास्कर, 31 मार्च। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने नक्सलवाद को लेकर बड़ा बयान देते (Naxalism Victory Chhattisgarh) हुए कहा कि प्रदेश ने इस लंबे संघर्ष में निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद से लगभग मुक्त हो चुका है और यह बदलाव सुरक्षा बलों, प्रशासन और जनता के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
कभी नक्सलियों का गढ़ था छत्तीसगढ़
गृह मंत्री ने कहा कि कुछ साल पहले तक छत्तीसगढ़ नक्सल गतिविधियों का सबसे बड़ा केंद्र था। वर्ष 2023 तक देश के करीब 75% नक्सली इसी राज्य में सक्रिय थे और हथियारबंद कैडर का लगभग 90% हिस्सा भी यहीं मौजूद था। लेकिन लगातार रणनीतिक कार्रवाई और सख्त अभियान के चलते अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है और नक्सली नेटवर्क तेजी से कमजोर हुआ है।
बस्तर की जनता और जवानों का अहम योगदान
मंत्री शर्मा ने इस सफलता का श्रेय बस्तर की जनता और सुरक्षा बलों को दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के सहयोग के बिना यह संभव (Naxalism Victory Chhattisgarh) नहीं था। वहीं, सुरक्षा बलों ने कठिन परिस्थितियों में भी साहस और धैर्य का परिचय देते हुए कई सफल ऑपरेशन किए। उन्होंने यह भी बताया कि कई ऑपरेशनों में नक्सलियों को भारी नुकसान हुआ, जबकि जवानों को किसी तरह की चोट तक नहीं आई। यह इस बात का संकेत है कि रणनीति और योजना पूरी तरह सटीक थी।
तकनीक और इंटेलिजेंस से मिली बढ़त
इस अभियान में आधुनिक तकनीक और इंटेलिजेंस का उपयोग निर्णायक साबित हुआ। मंत्री ने बताया कि टेक्नोलॉजी आधारित इनपुट्स के जरिए नक्सलियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई, जिससे ऑपरेशन ज्यादा प्रभावी और सटीक बन सके। यही कारण रहा कि सुरक्षा बलों को लगातार सफलता मिलती गई।
विपक्ष पर भी उठाए सवाल
गृह मंत्री ने कहा कि जब नक्सल विरोधी अभियान अपने चरम पर था, तब राजनीतिक सहयोग की उम्मीद थी, लेकिन कुछ विपक्षी नेताओं ने कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एनकाउंटर को लेकर लगाए गए आरोप निराधार थे, क्योंकि बाद में नक्सलियों ने खुद घटनाओं की पुष्टि की थी। मंत्री के अनुसार, बिना पूरी जानकारी के इस तरह के आरोप लगाना सुरक्षा बलों के मनोबल को प्रभावित करता है और उनके साहस पर सवाल खड़ा करता है।
जनसहभागिता से बदली तस्वीर
मंत्री शर्मा ने बताया कि नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर जैसे इलाकों में समाज के प्रमुखों और जनजातीय समुदायों के साथ लगातार संवाद किया गया। इन प्रयासों का सकारात्मक असर हुआ और कई नक्सलियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। पंचायत प्रतिनिधियों ने भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई और लोगों को समझाने का काम किया।
अब सिर्फ छोटे समूह ही बाकी
गृह मंत्री ने दावा किया कि नक्सली संगठन का लगभग 99% नेटवर्क खत्म हो चुका (Naxalism Victory Chhattisgarh) है। अब केवल कुछ छोटे समूह कांकेर के कुछ हिस्सों और दक्षिणी इलाकों में सीमित हैं, जिन पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि इन बचे हुए समूहों की गतिविधियां पूरी तरह ट्रैक की जा रही हैं और जल्द ही उन्हें भी खत्म कर दिया जाएगा या वे मुख्यधारा में लौट आएंगे।
पुनर्वास के लिए सरकार तैयार
सरकार की नीति पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि जो नक्सली हिंसा छोड़कर समाज में वापस आना चाहते हैं, उनके लिए पुनर्वास के दरवाजे हमेशा खुले हैं। उन्हें सुरक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन प्रदान किया जा रहा है, ताकि वे नई शुरुआत कर सकें। उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य सिर्फ नक्सलवाद को खत्म करना नहीं, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और विकास सुनिश्चित करना है।


