सीजी भास्कर 2 अप्रैल Black Day Bhilai : केंद्र सरकार द्वारा आगामी 1 अप्रैल 2026 से चार नए लेबर कोड लागू करने की घोषणा के विरोध में भिलाई में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। बुधवार को भिलाईनगर के प्रमुख संयुक्त श्रम संगठनों—इंटक, सीटू, एटक, एचएमएस, ऐक्टू और लोइमू—ने एक स्वर में इस निर्णय का विरोध किया। श्रमिक नेताओं ने इन कानूनों को मजदूर विरोधी बताते हुए ‘काला दिवस’ मनाया और जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रधानमंत्री को भेजा गया मांग पत्र
विरोध प्रदर्शन के दौरान संयुक्त ट्रेड यूनियनों ने अपनी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री के नाम एक औपचारिक ज्ञापन दुर्ग कलेक्टर के माध्यम से सौंपा। इस ज्ञापन में स्पष्ट रूप से चारों लेबर कोड को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि वे लंबे समय से इन श्रम संहिताओं का विरोध कर रहे हैं क्योंकि ये श्रमिकों के हितों के विपरीत हैं।
औपनिवेशिक काल से की गई तुलना
यूनियन नेताओं ने ज्ञापन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ये नई श्रम संहिताएं देश के मजदूरों को ब्रिटिश शासनकाल जैसी शोषणकारी स्थितियों में वापस धकेलने का एक प्रयास हैं। उनके अनुसार, यह कानून लागू होने से श्रमिकों के दशकों पुराने संघर्ष और उनके द्वारा हासिल किए गए अधिकारों पर गहरा आघात पहुंचेगा, जिससे कार्यस्थलों पर असुरक्षा का माहौल बनेगा।
श्रमिक अधिकारों पर संकट की चेतावनी
श्रम संगठनों ने याद दिलाया कि भारतीय श्रमिक वर्ग ने 8 घंटे के कार्य दिवस, यूनियन बनाने की आजादी, हड़ताल का अधिकार और सामूहिक सौदेबाजी के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि समान काम के लिए समान वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी, बोनस और ठेका प्रथा को समाप्त करने जैसे मौलिक अधिकारों को इन नए नियमों के माध्यम से कमजोर किया जा रहा है।


