गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में कांग्रेस पार्टी के भीतर संगठनात्मक रार अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। जिला कांग्रेस कमेटी पर गुटबाजी और समन्वय की कमी के गंभीर आरोप लग रहे हैं। मामला तब बिगड़ा जब पंचायत, वार्ड और बूथ स्तर की समितियों के गठन को लेकर जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्षों के बीच अलग-अलग सूचियां जारी होने लगीं। इस टकराव ने पार्टी की एकजुटता और आगामी चुनावी तैयारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक पद, दो सूचियां: कार्यकर्ताओं में भारी भ्रम
विवाद की शुरुआत 05 अप्रैल 2026 को हुई, जब जिला अध्यक्ष श्रीमती गाजमती भानु ने निचले स्तर की समितियों की आधिकारिक सूची जारी की। लेकिन इसके तुरंत बाद तीनों ब्लॉकों के अध्यक्षों ने भी अपनी अलग सूचियां जारी कर दीं। जिला स्तर और ब्लॉक स्तर द्वारा जारी की गई इन अलग-अलग सूचियों ने कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है कि आखिर वे किस कमेटी का हिस्सा हैं और उनका असली नेतृत्व कौन है।

पेंड्रा ब्लॉक का अध्यक्ष प्रशांत श्रीवास
“ब्लॉक अध्यक्षों के अधिकारों का हनन”: संयुक्त मोर्चा
इस विवाद में पेंड्रा ब्लॉक अध्यक्ष प्रशांत श्रीवास, गौरेला ब्लॉक अध्यक्ष बलबीर सिंह करसायल और मरवाही ब्लॉक अध्यक्ष दया वाकरे ने एकजुट होकर जिला अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
- ब्लॉक अध्यक्षों का तर्क: प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के नियमों के अनुसार, बूथ और वार्ड स्तर की समितियां गठित करने का अधिकार ब्लॉक अध्यक्षों के पास है।
- आरोप: ब्लॉक अध्यक्षों का दावा है कि जिला अध्यक्ष ने उनकी सहमति के बिना और प्रदेश नेतृत्व के दिशा-निर्देशों को दरकिनार करते हुए मनमाने ढंग से नियुक्तियां की हैं।

गौरेला ब्लॉक अध्यक्ष बीरबल सिंह करसायल
अनुशासन और प्रोटोकॉल पर उठ रहे सवाल
वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन में अनुशासन और प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमों के मुताबिक, इन जमीनी समितियों में जिला कांग्रेस कमेटी के सीधे हस्तक्षेप की जगह ब्लॉक स्तर के प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। आरोप है कि जिला अध्यक्ष ने ब्लॉक अध्यक्षों को विश्वास में लिए बिना अपनी पसंद के लोगों को पदों पर बैठा दिया है, जिससे पार्टी की जमीनी पकड़ कमजोर होने का खतरा बढ़ गया है।

मरवाही ब्लॉक अध्यक्ष दया वाकरे
उच्च नेतृत्व से हस्तक्षेप की गुहार
जिले के राजनीतिक गलियारों में इस “गृहयुद्ध” की चर्चा जोरों पर है। गुटबाजी की इस आग को बुझाने के लिए अब ब्लॉक अध्यक्षों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए, तो संगठन के भीतर का यह असंतोष भविष्य में पार्टी को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

जिला अध्यक्ष गाजमती भानु


