सीजी भास्कर, 14 अप्रैल : पांच राज्यों में चुनावी शंखनाद (CG BJP West Bengal Election 2026) के बाद छत्तीसगढ़ भाजपा ने पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अभेद्य माने जाने वाले गढ़ में सेंधमारी करने के लिए छत्तीसगढ़ के कद्दावर नेताओं और मंत्रियों की एक विशेष टीम बंगाल के मैदान में उतर चुकी है। इस मिशन की कमान पार्टी के कुशल रणनीतिकार और छत्तीसगढ़ प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय को सौंपी गई है, जिन्हें बंगाल की 56 विधानसभा सीटों का मुख्य प्रभारी बनाया गया है।
पवन साय की ‘चाणक्य’ रणनीति
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पवन साय की संगठनात्मक क्षमता पर भरोसा जताते हुए उन्हें बंगाल के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी है। इन 56 सीटों पर चुनाव प्रबंधन, बूथ स्तर की मजबूती और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करने का जिम्मा साय के कंधों पर है। छत्तीसगढ़ भाजपा (Chhattisgarh BJP Unit) के सूत्रों के मुताबिक, साय ने पहले ही बंगाल के विभिन्न जिलों का दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लेना शुरू कर दिया है।
तैनात ‘छत्तीसगढ़ी फौज’ CG BJP West Bengal Election 2026
सिर्फ पवन साय ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के अनुभवी मंत्रियों, विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं की एक बड़ी फौज बंगाल के विभिन्न जिलों में सक्रिय कर दी गई है। ये नेता न केवल चुनाव प्रबंधन संभाल रहे हैं, बल्कि केंद्र सरकार की जनहितकारी योजनाओं का घर-घर प्रचार-प्रसार कर मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में करने में जुटे हैं। राज्य इकाई का यह आक्रामक रुख बंगाल के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर रहा है।
जमीनी स्तर पर घेराबंदी और छत्तीसगढ़ मॉडल का प्रचार
छत्तीसगढ़ में भाजपा की प्रचंड जीत और वहां की ‘महतारी वंदन योजना’ जैसे सफल मॉडलों को बंगाल के मतदाताओं के सामने पेश किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के नेता वहां न केवल रैलियां कर रहे हैं, बल्कि वन-टू-वन चर्चा के जरिए टीएमसी (TMC) सरकार की विफलताओं को उजागर कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (West Bengal Assembly Elections 2026) की रणभेरी बजने के बाद छत्तीसगढ़ भाजपा की इस सक्रियता ने चुनावी सरगर्मियों को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।


