सीजी भास्कर, 16 अप्रैल 2026
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में तेंदूपत्ता फड़ मुंशियों ने अपनी मांगों को लेकर विधायक और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। फड़ मुंशियों का कहना है कि मोदी की गारंटी के तहत घोषित 25 हजार रुपए वार्षिक मानदेय दो साल बाद भी लागू नहीं हुआ है, जिससे 11 हजार फड़ मुंशी आक्रोशित हैं।
फड़ मुंशी संघ के जिला अध्यक्ष सुरजीत सेठिया के मुताबिक प्रदेश के लगभग 11 हजार फड़ मुंशी पिछले 38 सालों से लगातार अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित मानदेय तक नसीब नहीं हो पाया है, जिससे उनमें गहरी नाराजगी है। इसी के साथ उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी है।
ये काम करते हैं फड़ मुंशी
फड़ मुंशियों की भूमिका तेंदूपत्ता संग्रहण व्यवस्था में बेहद अहम मानी जाती है। वे न सिर्फ संग्रहण कार्य देखते हैं, बल्कि बोनस वितरण, चरण पादुका, शाखा कर्तन, बीमा योजनाओं और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करते हैं। इन योजनाओं का सीधा लाभ ग्रामीण और आदिवासी समुदाय को मिलता है।
संघ का कहना है कि 25 हजार वार्षिक मानदेय की घोषणा से फड़ मुंशियों और उनके परिवारों में उम्मीद जगी थी, लेकिन अब तक यह सिर्फ कागजों में ही सीमित है। इससे उनकी आर्थिक और मानसिक स्थिति पर असर पड़ रहा है।
बस्तर में जल्द ही शुरू होगी खरीदी
बस्तर में जल्द ही तेंदूपत्ता संग्रहण शुरू होने वाला है। ऐसे में फड़ मुंशियों की नाराजगी का असर प्रदेश के करीब 52 लाख संग्राहकों पर पड़ सकता है, जिससे पूरी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
फड़ मुंशी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और वन विभाग की होगी।


