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Home » 450 एकड़ जमीन पर कब्जा, धरसींवा विधानसभा में नेता पर संरक्षण के आरोप

450 एकड़ जमीन पर कब्जा, धरसींवा विधानसभा में नेता पर संरक्षण के आरोप

By Newsdesk Admin
17/04/2026
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सीजी भास्कर 17 अप्रैल

Contents
  • लाश दफनाने के लिए जगह भी नहीं बची
  • खेल मैदान की भूमि पर भी कब्जा
  • पशु चारागाह घास भूमि को भी नहीं छोड़ा
  • कोतवाली जमीन पर भी कब्जा, न्याय पाने भटक रहा कोतवाल
  • युवा सरपंच ने सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराने की करी पहल
  • कई जगह दिया आवेदन फिर भी नहीं हो रही सुनवाई
  • प्रशासन पर रसूखदारों को बचाने का आरोप
  • जांच के बाद दोषियों पर होगी कार्रवाई : कलेक्टर

 रायपुर। राजधानी रायपुर से लगे धरसींवा विधानसभा का ग्राम फरहदा कब्जापुर बन गया है. यहां 450 एकड़ ग्राम पंचायत की भूमि पर रसूखदार दबंगों ने कब्जा जमा लिया है. गांव में श्मशान भूमि तक नहीं बची है. गांव में किसी की मौत होने पर तालाब के मेड़ पर शव का अंतिम संस्कार करना पड़ता है। गांव में पाया कि श्माान घाट, खेल मैदान, पशु चरागाह की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है. हद तो तब हो गई जब पटवारी जमीन पर भी कब्जा कर लिया गया और कार्रवाई नहीं हुई. अतिक्रमण के खिलाफ युवा सरपंच की लड़ाई पर विधायक और प्रशासन ने चुप्पी साध ली है. ग्रामीणों का कहना है कि ये कब्जाधारी विधायक के चमचे हैं इसलिए कोई कार्रवाई नहीं हो रही है.

पिछले कई दशकों से फरहदा के किसान-मजदूर इस समस्या से जूझ रहे हैं. कई सरपंच आए-गए, लेकिन किसी ने रसूखदारों से जमीन छुड़वाने की हिम्मत नहीं दिखाई. ग्रामीणों ने बताया, कई लोग 40-50 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा करके रह रहे हैं. श्मशान घाट की जमीन भी हड़प ली गई. किसी की मौत हो जाए तो लाश दफनाने जगह नहीं मिलती. मजबूरन तालाब के मेड़ पर गड्ढा खोदकर दफनाना पड़ता है.

लाश दफनाने के लिए जगह भी नहीं बची

ग्रामीणों ने बताया कि हमारे गांव में लगभग 450 एकड़ सरकारी भूमि है, जिस पर गांव के कुछ रसूखदार लोगों ने कब्जा कर लिया है। कई तो ऐसे भी लोग हैं जो 40-50 एकड़ सरकारी भूमि पर कब्जा करके रह रहे हैं। गांव की भूमि के साथ रसूखदारों ने गांव की शमशान घाट की भूमि तक को कब्जा कर रखा है। गांव का आलम ये है कि जब भी किसी ग्रामीण की मौत होती है तो लाश दफनाने के लिए जगह नहीं है। लोग तालाब के मेड़ में लाश दफनाने के लिए मजबूर हैं।

खेल मैदान की भूमि पर भी कब्जा

आज से 10-12 वर्ष पहले जब डॉ. रमन सिंह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने इस गांव में पहुंचकर युवाओं के लिए खेल मैदान की घोषणा की थी, लेकिन उसके तत्काल बाद ही खेल मैदान की भूमि पर लोगों ने कब्जा कर लिया. आज इस गांव में खेल के लिए एक इंच भी भूमि नहीं है।

पशु चारागाह घास भूमि को भी नहीं छोड़ा

आज लगातार लोग गांव से अपने पशुओं को बाहर छोड़ने को इसलिए मजबूर हो रहे हैं, क्योंकि गांव में पशुओं के चरने के लिए बिल्कुल भी जगह नहीं बची है. रसूखदारों को जितना मन लगा उतनी जमीन पर उनके द्वारा कब्जा किया गया है. पशु चारागाह या कहे घास भूमि के लिए सरकारी दस्तावेज में आज भी भूमि उपलब्ध है, लेकिन उसे भी रसूखदारों ने नहीं छोड़ा है.

कोतवाली जमीन पर भी कब्जा, न्याय पाने भटक रहा कोतवाल

गांव में कोतवाल प्रणाली कई दशकों से चली आ रही है. गांव के कोतवाल को गांव का पुलिस भी कहा जाता है. रसूखदारों के हौसले इतने बुलंद है कि गांव के जो कोतवाल है उसकी भूमि पर भी कब्जा करके रखे हुए हैं. गांव का कोतवाल भी अपनी भूमि को इन रसूखदारों से कब्जामुक्त करवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक न्याय नहीं मिल पाया है.

युवा सरपंच ने सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराने की करी पहल

गांव के नए सरपंच बनते ही युवा सरपंच ने गांव के सरकारी जमीनों पर जिन लोगों ने कब्जा किया है उसे कब्जामुक्त कराने की पहल की है. ग्रामीण के बीच सबसे पहले ग्राम सभा बुलाई गई और ग्राम सभा में यह निर्णय लिया गया कि जितनी भी सरकारी भूमि है उसे रसूखदारों से कब्जा मुक्त करवाया जाएगा. सरपंच ने यह भी कहा कि जिस भूमि में घर या मकान बने हुए हैं उसे छोड़कर जहां लोगों ने कब्जा कर रखा है उसे ही कब्जामुक्त करवाया जाए, ताकि किसी भी ग्रामीण के घर ना टूटे, कोई बेघर ना हो, किसी को कोई परेशानी ना हो. प्रशासन को आवेदन किया गया कि जितनी भी सरकारी भूमि है सभी भूमि चिन्हांकित करके ग्राम पंचायत को इसकी जानकारी दी जाए.

कई जगह दिया आवेदन फिर भी नहीं हो रही सुनवाई

ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम सभा में निर्णय लेने के बाद गांव की सरकारी भूमि को चिन्हांकित करके देने के लिए कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार सबको आवेदन दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद आज तक ग्राम पंचायत को सरकारी भूमि चिन्हांकित करके नहीं दिया गया है.

प्रशासन पर रसूखदारों को बचाने का आरोप

ग्रामीणों ने बताया, अपनी गांव की भूमि को कब्जामुक्त करवाने के लिए पिछले 6 महीनों से सरकारी दफ्तरों और नेताओं के चक्कर काट रहे हैं. इसके बाद भी गांव की सरकारी भूमि को कब्जामुक्त नहीं कराया जा रहा है. नेताओं का साथ और आश्वासन तो ठीक मिल रहा है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी हमारी कोई बात नहीं सुन रहे हैं. ग्रामीणों ने कहा, ये कब्जा करने वाले स्थानीय विधायक के चमचे हैं.

जांच के बाद दोषियों पर होगी कार्रवाई : कलेक्टर

इस मामले में रायपुर कलेक्टर गौरव कुमार सिंह ने कहा, मामले की जांच कराते हैं. जो भी दोषी होगा उन पर कार्रवाई होगी.

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