सीजी भास्कर, 09 जुलाई। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में बिलासपुर का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। दो बेटियों ने आरोप लगाया कि उनके पिता ने पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी कर ली। जब मां ने भरण-पोषण की मांग की तो पति ने पुलिस से मिलीभगत कर उसे कथित तौर पर झूठे एनडीपीएस केस में फंसा दिया। (Bilaspur False NDPS Case)
महिला पिछले 6 महीने से जेल में बंद है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने मामले में निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए और सभी पहलुओं की जांच कर वास्तविक तथ्य सामने लाने को कहा।
यह मामला 8 जुलाई बुधवार को डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में हुई महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान सामने आया, जहां महिलाओं से जुड़े 47 मामलों की सुनवाई हुई।
बेटियों का आरोप- 6 महीने से जेल में हैं मां : Bilaspur False NDPS Case
सुनवाई के दौरान दोनों बेटियों ने आयोग को बताया कि उनके पिता वर्ष 2006 से मेडिकल व्यवसाय से जुड़े हैं और 2013 से बिलासपुर के सरकंडा स्थित अशोक नगर में मेडिकल स्टोर संचालित कर रहे थे। उनका आरोप है कि बाद में पिता ने भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने के लिए मेडिकल स्टोर अपने भांजे के नाम बेचने का दावा किया, जबकि आज भी उसी दुकान पर काम कर रहे हैं।
बेटियों ने आयोग को यह भी बताया कि उनकी मां द्वारा भरण-पोषण की मांग किए जाने पर पिता ने पहले उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी दी थी। इसके बाद घर की छत पर कथित तौर पर नशीली दवाइयां रखवाकर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया गया। इस मामले में उनकी मां पिछले करीब छह महीने से जेल में बंद है।
महिला आयोग ने पुलिस जांच पर भी उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान मौजूद ASP ने एफआईआर और जब्ती से जुड़े दस्तावेज आयोग के सामने पेश किया। दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद आयोग ने पाया कि जब्त की गई दवाइयों के बैच नंबर के आधार पर यह जांच ही नहीं की गई कि दवाइयां किस डीलर से खरीदी गई थीं और उनकी सप्लाई चेन क्या थी।
आयोग ने सरकंडा पुलिस को निर्देश दिए कि जब्त दवाइयों की दोबारा वैज्ञानिक और दस्तावेजी जांच कराई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि उनका मेडिकल स्टोर से कोई संबंध है या नहीं। आयोग ने आवेदिका और उसके रिश्तेदारों से भी पूछताछ करने के निर्देश दिए, ताकि वास्तविक आरोपी तक पहुंचा जा सके और अगर महिला निर्दोष है तो उसे न्याय मिल सके।
परिवार को आयोग की कानूनी सलाह : Bilaspur False NDPS Case
आयोग ने पीड़ित बेटियों को सलाह दी कि वे परिवार न्यायालय में भरण-पोषण से जुड़े पुराने मामले को दोबारा खुलवाने, बकाया राशि की वसूली कराने और नियमित भरण-पोषण दिलाने के लिए आवेदन करें। आयोग ने यह भी कहा कि अगर पिता ने पहली पत्नी के रहते दूसरा विवाह किया है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई कराई जा सकती है।
इधर, बच्चियों के मामा ने कहा कि बहन को सरकंडा पुलिस और बहनोई रामकिशोर ने प्लानिंग के तहत फंसाया है। बहन बेगुनाह है और रामकिशोर के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई किया जाए। इस मामले में पुलिसकर्मी शैलेंद सिंह भी शामिल हैं।
आयोग में 47 मामलों की हुई सुनवाई
बुधवार को छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में आयोजित जनसुनवाई में महिलाओं से जुड़े 47 मामलों की सुनवाई हुई। इस दौरान घरेलू हिंसा, भरण-पोषण, दूसरी शादी, कार्यस्थल पर विवाद, पुलिस जांच में लापरवाही और संपत्ति संबंधी मामलों पर सुनवाई हुई।
आयोग ने अधिकतर मामलों में पक्षकारों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देने, पुलिस जांच में तेजी लाने, भरण-पोषण सुनिश्चित कराने और आपसी सहमति से मामलों के निराकरण के निर्देश दिए।
दूसरी शादी और भरण-पोषण के मामलों पर भी सुनवाई
सुनवाई के दौरान एक महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति ने पहली शादी रहते दूसरी शादी कर ली और उसे भरण-पोषण भी नहीं दे रहा है। आयोग ने महिला को विवाह को शून्य घोषित कराने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की सलाह दी।
एक अन्य मामले (Bilaspur False NDPS Case) में सामाजिक स्तर पर समझौता होने के बाद महिला को 1 लाख रुपए दिए जाने की जानकारी आयोग को दी गई। आयोग ने सखी केंद्र के काउंसलर की मौजूदगी में महिला को उसका सामान दिलाने पूरी प्रक्रिया की फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के निर्देश दिए।



