सीजी भास्कर, 06 जुलाई : छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ के वन क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक नई पहल शुरू होने जा रही है। जिला प्रशासन ने बस्तर अंचल में बड़े पैमाने पर कॉफी खेती परियोजना (Abujhmad Coffee Farming) शुरू करने की तैयारी की है। इसी क्रम में नारायणपुर कलेक्टर ने भारत सरकार के कॉफी बोर्ड के विशेषज्ञों के साथ कुतुल, कच्चापाल, कोडलियार, ईरकभट्टी और तोके सहित सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों का विस्तृत निरीक्षण किया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय ग्रामीणों को दीर्घकालिक रोजगार और आय का स्थायी स्रोत उपलब्ध कराना है।
कॉफी उत्पादन के लिए अनुकूल मिली जलवायु और मिट्टी
निरीक्षण के दौरान कॉफी बोर्ड के विशेषज्ञों ने क्षेत्र की जलवायु, वार्षिक वर्षा, तापमान, मिट्टी की गुणवत्ता और समुद्र तल से ऊंचाई का वैज्ञानिक अध्ययन किया। विशेषज्ञों ने पाया कि अबूझमाड़ का प्राकृतिक वातावरण कॉफी खेती परियोजना (Abujhmad Coffee Farming) के लिए पूरी तरह अनुकूल है। यहां कॉफी आधारित कृषि वानिकी मॉडल विकसित कर स्थानीय ग्रामीणों को बड़े पैमाने पर रोजगार से जोड़ा जा सकता है।
चार साल बाद शुरू होगा व्यावसायिक उत्पादन
कॉफी बोर्ड के विशेषज्ञों के अनुसार कॉफी के पौधों का लगभग चार वर्षों तक रखरखाव करने के बाद व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा। इसके बाद यह स्थानीय ग्रामीणों के लिए पीढ़ी-दर-पीढ़ी नियमित आय का मजबूत माध्यम बन सकता है। कॉफी खेती परियोजना (Abujhmad Coffee Farming) में स्थानीय स्व-सहायता समूहों (SHGs) और ग्रामीणों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि प्रत्येक परिवार के कम से कम एक सदस्य को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सके। प्रारंभिक चरण में भूमि चयन, प्लांटेशन और स्थानीय स्तर पर नर्सरी विकसित करने का कार्य शुरू किया जाएगा।
कोरापुट में तकनीकी प्रशिक्षण लेंगे अधिकारी
कॉफी बोर्ड के सुझाव पर नारायणपुर कलेक्टर ने जिले के कृषि अधिकारियों और कर्मचारियों को ओडिशा के कोरापुट में तकनीकी प्रशिक्षण के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं। वहां अधिकारी कॉफी खेती परियोजना (Abujhmad Coffee Farming) से जुड़े उत्पादन, पौध प्रबंधन, पर्यावरणीय आवश्यकताओं और आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे, ताकि लौटकर स्थानीय किसानों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकें।
भविष्य में चाय की खेती की भी बनेगी योजना
विशेषज्ञ दल के साथ चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि अबूझमाड़ की वादियां चाय की खेती के लिए भी उपयुक्त हैं। इसे देखते हुए कलेक्टर ने भविष्य में चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कॉफी खेती परियोजना (Abujhmad Coffee Farming) के सफल होने के बाद क्षेत्र में चाय उत्पादन की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा।
कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान भारत सरकार के कॉफी बोर्ड के उप निदेशक, आंध्र प्रदेश के प्रभारी अधिकारी, क्षेत्रीय कॉफी अनुसंधान केंद्र के अधिकारी, कोरापुट के वरिष्ठ संपर्क अधिकारी, जिला उप संचालक कृषि तथा जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।



