सीजी भास्कर, 18 जून : सोशल मीडिया पर शादी कराने का दावा करने वाले विज्ञापनों के जरिए लोगों को फंसाकर करोड़ों रुपये की ठगी (AI Matrimonial Fraud) करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का खुलासा हुआ है। गिरोह फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक युवतियों की एआई जनरेटेड तस्वीरें दिखाकर लोगों को शादी का झांसा देता था और फिर विभिन्न शुल्कों के नाम पर रकम वसूलता था। कानपुर पुलिस ने इस मामले में छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी रंजीश कुमार गौड़ को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी कानपुर में तीन कॉल सेंटर संचालित कर रहा था, जहां 23 युवतियां काम करती थीं। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने पिछले एक वर्ष के दौरान लगभग 2000 लोगों से पांच करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है।
शिकायत के बाद खुला फर्जी मैरिज ब्यूरो का खेल
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार बाराबंकी के रामनगर निवासी चंद्रेश कुमार ने किदवईनगर स्थित ‘परफेक्ट रिश्ते’ नामक कॉल सेंटर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क होने के बाद शादी कराने के नाम पर फरवरी से मई के बीच उनसे लगभग चार लाख रुपये वसूले गए। जब विवाह की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और उन्होंने पैसे वापस मांगे तो रकम नहीं लौटाई गई।
जांच में पता चला कि ‘परफेक्ट रिश्ते’, ‘शादी मैच इंडिया’ और ‘शादी मैच’ नाम से संचालित कॉल सेंटरों के माध्यम से यह ठगी का नेटवर्क चलाया जा रहा था।
सोशल मीडिया पर विज्ञापन, फिर शुरू होता था ठगी का खेल
कॉल सेंटर में कार्यरत युवतियां फेसबुक और इंस्टाग्राम पर मैरिज ब्यूरो के विज्ञापन और पोस्ट साझा करती थीं। इच्छुक लोगों से संपर्क कर उनकी तस्वीरें मंगवाई जाती थीं। तस्वीरों और बातचीत के आधार पर उनकी आर्थिक स्थिति का आकलन किया जाता था।
इसके बाद पंजीकरण शुल्क, प्रोफाइल निर्माण शुल्क, युवती का संपर्क विवरण उपलब्ध कराने और सुरक्षा शुल्क के नाम पर अलग-अलग रकम ली जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि ‘प्रैंक पेमेंट’ नामक एप के जरिए फर्जी भुगतान रसीदें तैयार कर ग्राहकों को भेजी जाती थीं।
टेलीकॉलर ही बनती थीं कथित दुल्हन
पुलिस जांच में पता चला कि जिन युवतियों से बात कराने का दावा किया जाता था, वास्तव में कॉल सेंटर की टेलीकॉलर ही युवती (AI Matrimonial Fraud) बनकर बात करती थीं। ग्राहकों को 24 घंटे में केवल एक बार बातचीत कराई जाती थी। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित समय से पहले दोबारा संपर्क करता तो उस पर पेनाल्टी के नाम पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता था।
43 कीपैड मोबाइल, 13 स्मार्टफोन और दस्तावेज जब्त
पुलिस ने नौबस्ता और किदवईनगर स्थित तीन कॉल सेंटरों पर छापेमारी कर 43 कीपैड मोबाइल फोन, 13 एंड्रॉयड मोबाइल, 500 पंपलेट, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच में कई बैंक खातों के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है।
गिरोह में छत्तीसगढ़ के दो अन्य युवक भी शामिल
पुलिस के अनुसार गिरोह में छत्तीसगढ़ निवासी अमित और करम पटेल भी शामिल हैं। अमित साइबर मामलों से जुड़े अधिवक्ता के रूप में काम करता था। शिकायत या कानूनी नोटिस आने पर वह मामलों को संभालता था। पुलिस के मुताबिक खातों के फ्रीज होने पर पैसे वापस कर खातों को दोबारा सक्रिय कराया जाता था।
जांच एजेंसियों को अधिवक्ता की लोकेशन आगरा और गिरोह से जुड़ी एक महिला की लोकेशन गोवा में मिली है। दोनों सहित तीन आरोपी फिलहाल फरार हैं।
दुर्ग पुलिस भी खंगालेगी रिकॉर्ड
कानपुर पुलिस के अनुसार इन कॉल सेंटरों के खिलाफ नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में तीन शिकायतें दर्ज हैं। वहीं दुर्ग पुलिस अधीक्षक सत्य प्रकाश तिवारी ने बताया कि आरोपी रंजीश कुमार गौड़ के खिलाफ जिले में फिलहाल कोई मामला दर्ज नहीं है, लेकिन उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।





