सीजी भास्कर, 23 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी (Amit Jogi Case) के पुत्र और पूर्व विधायक अमित जोगी को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके सरेंडर करने की समय-सीमा पर फिलहाल रोक लगा दी है। ज्ञात हो कि बिलासपुर हाई कोर्ट ने उन्हें इस हत्याकांड में दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी और 23 अप्रैल तक समर्पण करने का आदेश दिया था।
अमित जोगी ने अपनी याचिका में दो प्रमुख न्यायिक आदेशों को चुनौती दी है। पहला, जिसमें सीबीआई को अपील दायर करने की अनुमति दी गई थी और दूसरा, बिलासपुर हाई कोर्ट का वह अंतिम फैसला जिसके तहत उन्हें हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इस (Amit Jogi Case) में अमित जोगी की ओर से पक्ष रखते हुए दलीलों में सजा पर स्थगन की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल सरेंडर से तत्काल छूट प्रदान की है, बल्कि इस (Amit Jogi Case) के संदर्भ में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब भी तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक पूर्व विधायक को पुलिस या अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने की आवश्यकता नहीं होगी।
जग्गी हत्याकांड का यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्यायपालिका में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। हाई कोर्ट द्वारा निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी ठहराए जाने के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ गई थीं। हालांकि, अब गेंद सीबीआई के पाले में है। एजेंसी के जवाब के बाद ही इस (Amit Jogi Case) का भविष्य और अमित जोगी की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप ने जोगी खेमे को एक बड़ी संजीवनी प्रदान की है।


