सीजी भास्कर, 10 सितंबर : सरकारी निर्माण कार्य लेकर उन्हें समय पर पूरा नहीं करने वाले ठेकेदारों पर अब सख्ती शुरू हो गई है। लोक निर्माण विभाग ने सड़क और पुल निर्माण में लगातार सुस्ती बरतने वाले 6 ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई (Bastar PWD Action) करते हुए उनके पंजीयन के नवीनीकरण पर रोक लगा दी है। कार्रवाई की अवधि अलग-अलग मामलों में 2 से 5 वर्ष तक है, जबकि दो ठेकेदारों के पंजीयन सीधे निरस्त कर दिए गए हैं।
बस्तर संभाग की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया। विभाग के अनुसार संबंधित ठेकेदारों को काम में तेजी लाने के लिए कई बार नोटिस दिए गए थे। इसके बावजूद निर्माण की गति में सुधार नहीं हुआ। अनुबंध अवधि बढ़ाने और काम पूरा करने को लेकर ठेकेदारों की ओर से शपथ पत्र दिए जाने के बाद भी परियोजनाएं अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ीं। इसे निर्माण कार्यों में देरी (Bastar PWD Action) मानते हुए विभाग ने पंजीयन संबंधी कार्रवाई की है।
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नोटिस के बाद भी नहीं सुधरा काम
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय ने के. मोहन रेड्डी, मेसर्स शांति विजय कन्सट्रक्शन, मेसर्स ट्रांसाफ्ट इंफ्रा., मेसर्स राघवा कन्सट्रक्शन, मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेसर्स पंकज हालदार के खिलाफ कार्रवाई की है। विभाग का कहना है कि सड़क, पुल और पुलिया निर्माण में अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं किया गया और काम की प्रगति बेहद धीमी रही।
विभागीय कार्रवाई का सीधा असर इन ठेकेदारों के पंजीयन पर पड़ा है। अधिकारियों ने सार्वजनिक आवागमन से जुड़े निर्माण कार्यों को लंबे समय तक अधूरा रखने को गंभीरता से लिया है। PWD की सख्ती (Bastar PWD Action) से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सरकारी परियोजनाओं में तय समयसीमा और अनुबंध की शर्तों की अनदेखी करने पर कार्रवाई होगी।
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दो पंजीयन सीधे निरस्त
कार्रवाई में के. मोहन रेड्डी और मेसर्स ट्रांसाफ्ट इंफ्रा. के पंजीयन निरस्त किए गए हैं। दोनों मामलों में आदेश जारी होने की तारीख से अगले 5 वर्षों तक पंजीयन के नवीनीकरण पर रोक रहेगी।
के. मोहन रेड्डी सुकमा जिले में भेज्जी-चिंतागुफा मार्ग और चिंतलनार-मरियागुड़म सड़क निर्माण से जुड़े थे। वहीं मेसर्स ट्रांसाफ्ट इंफ्रा. चिंतलनार-मरियागुड़म मार्ग का काम कर रहा था। इन परियोजनाओं में काम की धीमी गति को लेकर विभाग ने यह कदम उठाया है। ठेकेदारों का पंजीयन निरस्त (Bastar PWD Action) होना कार्रवाई की गंभीरता को दर्शाता है।
इन कंपनियों पर भी रोक
सुकमा जिले में चिंतलनार-मरियागुड़म और कोंटा-गोलापल्ली मार्ग का निर्माण कर रहे मेसर्स राघवा कन्सट्रक्शन के पंजीयन के नवीनीकरण पर 5 साल की रोक लगाई गई है। नारायणपुर-सोनपुर-मरोड़ा मार्ग का निर्माण कर रहे मेसर्स शांति विजय कन्सट्रक्शन पर भी 5 वर्ष तक पंजीयन नवीनीकरण की कार्रवाई की गई है।
कोंटा-गोलापल्ली मार्ग का काम कर रहे मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 2 वर्ष की रोक लगाई गई है। वहीं नारायणपुर-सोनपुर-मरोड़ा मार्ग पर पुल-पुलिया निर्माण कर रहे मेसर्स पंकज हालदार के पंजीयन के नवीनीकरण पर 5 वर्ष तक रोक रहेगी। इस तरह बस्तर की सड़क परियोजनाओं (Bastar PWD Action) से जुड़े छह ठेकेदार विभागीय कार्रवाई के दायरे में आए हैं।
सरकार ने हाई कोर्ट में भी तैयारी की
राज्य शासन ने ठेकेदारों के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर बिलासपुर उच्च न्यायालय में कैविएट भी दायर की है। शासन की ओर से यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कार्रवाई के खिलाफ संभावित न्यायिक चुनौती की स्थिति में उसका पक्ष पहले से न्यायालय के समक्ष रखा जा सके।
लोक निर्माण विभाग की इस कार्रवाई से साफ है कि सरकार अब लंबे समय तक अधूरे पड़े सड़क और पुल निर्माण कार्यों को लेकर सख्त रुख अपना रही है। विभागीय स्तर पर परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के बाद जिम्मेदारी तय करने और अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई का सिलसिला आगे भी जारी रहने की संभावना है।
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